आजकल फल प्रेमियों और बागवानी के शौकीन लोगों के बीच डेकोपोन संतरा तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. यह एक खास किस्म का संतरा है, जो अपने बड़े आकार, बिना बीज के गूदे और असाधारण मिठास के लिए जाना जाता है. इसे खाने में जितना आसान माना जाता है, इसकी खेती भी उतनी ही आसान है. अगर आपके पास भी फार्म हाउस या बड़ा बगीचा है और वहां कुछ अलग और खास उगाना चाहते हैं, तो डेकोपोन संतरा एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है. आइए जानते हैं इसे उगाने का पूरा तरीका.
क्या है डेकोपोन संतरा
डेकोपोन असल में सत्सुमा, नेवल और मैंडरिन संतरे को आपस में मिलाकर तैयार की गई एक हाइब्रिड किस्म है, जिसे सबसे पहले जापान में विकसित किया गया था. इसकी सबसे बड़ी पहचान इसका ऊपर की तरफ उभरा हुआ हिस्सा है, जिसे इसका टॉपनॉट कहा जाता है. इसका छिलका थोड़ा मोटा और खुरदुरा होता है, लेकिन इसे हाथ से आसानी से छीला जा सकता है. इसका गूदा पूरी तरह बीज रहित, रसीला और सामान्य संतरों के मुकाबले काफी ज्यादा मीठा होता है.
सही जगह और मिट्टी का चुनाव
डेकोपोन संतरे का पौधा लगाने के लिए ऐसी जगह चुनें, जहां दिनभर में कम से कम 6 से 8 घंटे तक सीधी धूप आती हो. यह पौधा गर्म और गुनगुनी जलवायु में सबसे अच्छी तरह पनपता है. मिट्टी की बात करें, तो इसके लिए हल्की अम्लीय से लेकर सामान्य पीएच वाली, अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. अगर मिट्टी में पानी रुकने की समस्या हो, तो जड़ों के सड़ने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए जल निकासी का खास ध्यान रखना जरूरी है.
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पौधा कैसे लगाएं
डेकोपोन संतरे का पौधा लगाने के लिए सबसे अच्छा तरीका है ग्राफ्टेड पौधा खरीदना. ग्राफ्टेड पौधे में फल जल्दी आने लगते है और फलों की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है. पौधा लगाने से पहले करीब दो से तीन फीट गहरा और चौड़ा गड्ढा खोदें. इस गड्ढे में मिट्टी के साथ गोबर की खाद या जैविक कंपोस्ट अच्छी तरह मिलाकर भर दें. इसके बाद पौधे को बीच में रखकर चारों तरफ से मिट्टी दबा दें और तुरंत हल्का पानी दें.
पानी और खाद देने का सही तरीका
डेकोपोन का पौधा शुरूआती दिनों में नियमित पानी मागंता है, क्योंकि इससे पौधे को मिलने वाले पोषक तत्व कम हो जाते हैं. मिट्टी को हल्की नम रखना ही काफी होता है. गर्मी के मौसम पानी की जरूरत थोड़ी बढ़ जाती है, जबकी सर्दी में इसे कम पानी चाहिए होती है. पौधे की अच्छी ग्रोथ और मीठे फलों के लिए समय-समय पर जैविक खाद देना जरूरी है. साल में दो से तीन बार गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट डालने से पौधे की सेहत बनी रहती है.
