भारत में भैंस पालन किसानों के लिए कमाई का एक पुराना और महत्वपूर्ण जरिया है. देश के कई हिस्सों में भैंसों को दूध उत्पादन के लिए पाला जाता है और मुर्रा जैसी नस्लें अपने दूध के लिए काफी प्रसिद्ध हैं. लेकिन जब अफ्रीकी केप भैंस की बात आती है तो मामला थोड़ा अलग है. नाम में भैंस होने के बावजूद यह भारत में पाली जाने वाली घरेलू भैंस जैसी नहीं है. यह अफ्रीका में पाई जाने वाली जंगली भैंस है, जो अपने मजबूत शरीर, बड़े सींग और जंगली स्वभाव के लिए जानी जाती है. इसी वजह से इसके दूध और पालन को लेकर कई लोगों के मन में सवाल रहता है.
अफ्रीकी केप भैंस कैसी होती है?
अफ्रीकी केप भैंस को अफ्रीकी भैंस भी कहा जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम Syncerus caffer है. यह अफ्रीका के कई हिस्सों में पाई जाती है और जंगलों, घास के मैदानों तथा पानी के आसपास के इलाकों में रह सकती है. इसका शरीर काफी मजबूत होता है और इसके सींग इसकी सबसे खास पहचान हैं. यह पालतू पशु नहीं है, इसलिए इसे भारत में डेयरी फार्म पर पाली जाने वाली सामान्य भैंस के बराबर समझना सही नहीं होगा.
एक दिन में कितना दूध देती है?
केप भैंस को दूध उत्पादन के लिए पाली जाने वाली घरेलू भैंस की तरह नहीं देखा जाता. इसलिए इसके लिए रोजाना दूध देने का कोई सामान्य डेयरी आंकड़ा बताना सही नहीं होगा. जंगली भैंस के बच्चे अपनी मां के दूध पर निर्भर रहते हैं, लेकिन इंसानों के लिए नियमित दूध उत्पादन इसका उद्देश्य नहीं होता. यही कारण है कि इसे मुर्रा या दूसरी डेयरी नस्लों की तरह दूध देने वाली भैंस मानकर तुलना करना सही नहीं माना जाता है.
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भारत की भैंसों से है काफी अंतर
भारत में पाली जाने वाली घरेलू भैंस और अफ्रीकी केप भैंस अलग हैं. भारत की घरेलू भैंसों को लंबे समय से दूध और कृषि से जुड़े कामों के लिए पाला जाता रहा है. वहीं केप भैंस जंगली प्रजाति है और उसका व्यवहार भी उसी हिसाब से होता है. उसे पाला नहीं जा सकता भारत में मुर्रा, जाफराबादी, भदावरी, मेहसाना और सुरती जैसी घरेलू भैंसों की नस्लें पशुपालन में इस्तेमाल होती हैं.
भारत में कहां मिलेगी?
अफ्रीकी केप भैंस मूल रूप से भारत के जंगलों में नहीं पाई जाती है, क्योंकि यह पूरी तरह से एक अफ्रीकी जंगली जीव् है. अफ्रीकी केप भैंस भारत के सामान्य पशु बाजार या डेयरी फार्म में नहीं मिलती., इसलिए इसे रखने या विदेश से लाने का मामला सामान्य पशुपालन से अलग है. वन्यजीवों और विदेशी प्रजातियों से जुड़े नियम ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण हो सकते हैं. लेकिन भारत कुछ चुनिंदा चिड़ियाघरों में यह भैस देखने को मिल सकती है.
इसे डेयरी भैंस समझना सही नहीं
अफ्रीकी केप भैंस की ताकत और बड़ा शरीर देखकर कई लोगों को लग सकता है कि यह बहुत ज्यादा दूध देने वाली भैंस होगी. लेकिन ऐसा मानना सही नहीं है. इसका मुख्य परिचय एक जंगली अफ्रीकी जानवर के रूप में है, न कि डेयरी पशु के रूप में. अगर किसी किसान का उद्देश्य दूध उत्पादन है तो उसे अपने इलाके के हिसाब से मान्यता प्राप्त घरेलू डेयरी नस्लों पर ध्यान देना चाहिए.
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