आज के समय में मार्केट से कोई भी सब्जी खरीदकर घर लाना किसी खतरे से खाली नहीं लगता. हर सब्जी पर धड़ल्ले से खतरनाक कीटनाशक और यूरिया इस्तेमाल किया जा रहा है. जिससे सेहत पर काफी बुरा असर पड़ सकता है. खासकर बरसात के दिनों में आने वाली तोरई को तरोताजा और चमकदार दिखाने के लिए उस पर ऐसे-ऐसे केमिकल्स छिड़के जाते हैं जो शरीर को अंदर से बहुत नुकसान पहुंचा देते हैं.
अगर आप भी अपने परिवार को इन जहरीले केमिकल्स से बचाना चाहते हैं और चाहते हैं कि एकदम शुद्ध, ताजी सब्जी मिले तो अब बाजार लाने की बजाय इसे आप बहुत ही आसानी से अपने घर की छत पर गमले में या आंगन में उगा सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं घर पर केमिकल फ्री तोरई उगाने का एकदम आसान सा तरीका.
बीज का चुनाव और गमला तैयार करने का तरीका
घर पर गार्डनिंग की शुरुआत करनी है तो सबसे पहले सही बीज और मिट्टी का चुनाव करना जरूरी है. तोरई उगाने के लिए आपको 12 से 15 इंच का कोई बड़ा गमला या ग्रो बैग लेना होता है. बस इस बात का ध्यान रखें कि गमले के नीचे पानी निकलने के लिए ड्रेनेज होल जरूर होना चाहिए जिसे जड़ों में पानी न सड़े.
मिट्टी तैयार करने के लिए सामान्य मिट्टी में बराबर मात्रा में पुरानी और सड़ी हुई गोबर की खाद मिला लें. थोड़ी सी नीम की खली भी मिला दें जिससे मिट्टी में कोई फंगस या दीमक न लगे. अब बाजार से किसी अच्छी वैरायटी के तोरई के बीज ले आएं.
इन बीजों को बोने से पहले 6 से 8 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रख दें. इससे बीजों का जर्मिनेशन बहुत तेजी से होता है. हर गमले में 2 से 3 बीज करीब एक इंच की गहराई में दबा दें और हल्का पानी छिड़क दें. कुछ ही दिनों में छोटे पौधे बाहर निकल आएंगे.

बेल की देखभाल, मचान बनाना और खाद-पानी का हिसाब
तोरई एक बेलदार फसल है इसलिए जैसे-जैसे पौधा बड़ा होता है, उसे ऊपर चढ़ने के लिए सहारे की जरूरत पड़ती है. पौधे के करीब एक मजबूत डंडा गाड़ दें या फिर रस्सी का सहारा देकर एक छोटा सा मचान तैयार कर दें. बेल जितनी अच्छे से फैलेगी और धूप खाएगी. उस पर उतने ही ज्यादा फूल और फल लगेंगे. तोरई के पौधों को धूप बहुत पसंद है. इसलिए गमले को ऐसी जगह रखें जहां दिनभर में कम से कम 5 से 6 घंटे की अच्छी धूप मिलती रहे.
सिंचाई और पोषण की बात करें तो गर्मियों में हर दूसरे दिन और सर्दियों में हफ्ते में दो बार पानी देना काफी रहता है. लेकिन ध्यान रहे कि मिट्टी में सिर्फ नमी बनी रहनी चाहिए पानी का भराव नहीं होना चाहिए. केमिकल यूरिया डालने के बजाय हर 15 से 20 दिन में गमले की हल्की गुड़ाई करके उसमें लिक्विड गोबर की खाद घोल डालें. इससे पौधों को ताकत मिलती है और पत्तियां एकदम हरी-भरी रहती हैं.

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कीटों से बचाव के देसी उपाय
अगर बेल पर कीड़े या इल्लियां लग जाएं तो बाजार के जहरीले कीटनाशकों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना है. इसके बजाय आप घर पर ही नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर या गौमूत्र और नीम के तेल का स्प्रे बनाकर बेल पर छिड़क सकते हैं. यह एकदम नेचुरल कीटनाशक है जो एक झटके में सारे कीटों को भगा देता है.
ऐसे करें तुड़ाई
तोरई की बेल पर नर और मादा दोनों तरह के फूल आते हैं, और कई बार कीटों के न होने पर पॉलिनेशन ठीक से नहीं हो पाता. ऐसे में आप हल्के हाथ से आर्टिफिशियल पॉलिनेशन भी कर सकते हैं. कुछ ही हफ्तों में बेल पर तोरई लटकनी शुरू हो जाएगी. जब तोरई का साइज 8 से 10 इंच का हो जाए और वह अंदर से नरम हो तभी उसे तोड़ लें. ज्यादा पक जाने पर तोरई सख्त हो जाती है.
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