Crab Farming Business: मछली पालन के साथ अब केकड़ा पालन भी किसानों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए कमाई का एक नया जरिया बन रहा है. खासकर तटीय इलाकों में मड क्रैब और ब्लू स्विमिंग क्रैब की मांग को देखते हुए वैज्ञानिक तरीके से इसका पालन किया जा रहा है. ICAR-CIBA भी किसानों को केकड़ा पालन की तकनीक और प्रशिक्षण दे रहा है. अगस्त 2026 में संस्थान ने मड क्रैब और ब्लू स्विमिंग क्रैब पालन को लेकर भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था.
केकड़ा पालन में तालाब, जलाशय या खास तरह के बॉक्स में केकड़ों को एक तय समय तक पालकर बाजार के आकार तक बड़ा किया जाता है. भारत में मड क्रैब की खेती पर काफी काम हुआ है. ICAR-CIBA के मुताबिक Scylla Serrata और Scylla Olivacea मड क्रैब की प्रमुख प्रजातियां हैं. इनमें ग्रीन मड क्रैब को तेजी से बढ़ने, बड़े आकार और बेहतर बाजार भाव के कारण खेती के लिए अहम माना जाता है.
कौन से केकड़े पाल सकते हैं?
मड क्रैब के अलावा अब ब्लू स्विमिंग क्रैब के पालन पर भी काम हो रहा है. जून 2026 में ICAR-CIBA ने हैचरी से तैयार बीज और विशेष फीड के साथ ब्लू स्विमिंग क्रैब पालन की तकनीक का प्रदर्शन किया. 105 दिन के पालन में करीब 1,100 किलो प्रति हेक्टेयर उत्पादन दर्ज किया गया और औसत बाजार भाव 500 रुपये प्रति किलो रहा.
कैसे शुरू करें केकड़ा पालन?
इसके लिए पानी की सही व्यवस्था सबसे जरूरी है. तालाब में केकड़ों के लिए पर्याप्त जगह, पानी का अच्छा प्रवाह और बच निकलने से रोकने के इंतजाम होने चाहिए. मड क्रैब के मामले में सीधे तालाब में बहुत ज्यादा संख्या में केकड़े छोड़ना ठीक नहीं माना जाता, क्योंकि इनमें आपस में लड़ने और बिल बनाने की आदत होती है. ICAR-CIBA ने बॉक्स कल्चर जैसी तकनीक भी विकसित की है, जिसमें हर केकड़े को अलग बॉक्स में रखा जाता है.
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खाने में क्या दें?
केकड़ों को आमतौर पर मछली और दूसरे जलीय जीवों से मिलने वाला आहार दिया जाता है. ICAR-CIBA की तकनीक में मछली के मांस के साथ तैयार फीड के इस्तेमाल के उदाहरण भी मिलते हैं. पानी की सफाई, ऑक्सीजन और दूसरी स्थितियों की नियमित निगरानी भी जरूरी है.
कमाई कितनी हो सकती है?
केकड़ा पालन में कमाई कई चीजों पर निर्भर करती है, जैसे प्रजाति, पालन का तरीका, उत्पादन, बाजार भाव और लागत. इसलिए 800 से 1,500 रुपये प्रति किलो का भाव हर जगह तय मानना सही नहीं होगा. ICAR-CIBA की एक हालिया ब्लू स्विमिंग क्रैब डेमो में 500 रुपये प्रति किलो का बाजार भाव मिला, जबकि मड क्रैब की एक बॉक्स-कल्चर तकनीक में 500 से 800 रुपये प्रति किलो तक स्थानीय बाजार में बिक्री दर्ज की गई थी.
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