उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनाव की सरगर्मी अभी से तेज होती नजर आ रही है. चुनावों के समय का सबसे बड़ा फायदा किसानों का होता दिख रहा है. अक्सर चुनावों से ठीक पहले सरकारों को किसानों की याद आती है और इस बार कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है. यूपी इलेक्शन नजदीक आते ही राज्य सरकार ने किसानों के लिए तरह-तरह की योजनाएं शुरू करने का ऐलान कर दिया है.
चाहे बाढ़ प्रभावित इलाकों में त्वरित राहत पहुंचाने की बात हो या फिर रबी सीजन के लिए उन्नत बीजों और या फिर फसल के नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा. सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. चलिए आपको बताते हैं सरकार की ओर से इलेक्शन से पहले किसानों के लिए कौन-कौन सी नई योजनाएं शुरू की हैं और इसका कैसे फायदा मिलने वाला है.
बाढ़ और बारिश से फसल बर्बाद के लिए मुआवजा
खेती में मौसम की मार सबसे बड़ी परेशानी बनकर आती है. अभी हालिया बेमौसम बरसात से यूपी के सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं और हजारों हेक्टेयर फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो गई हैं. ऐसे संकट के वक्त किसानों को दिलासा देने के लिए सरकार की ओर से चुनाव से ठीक पहले यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जिन किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं. उनके फसल बीमा के दावों का निपटारा एकदम टाइम-बाउंड तरीके से हो.
जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे खुद फील्ड में जाकर सर्वे की निगरानी करें जिससे एक-एक एकड़ का सही आकलन हो सके. जिन किसानों ने बीमा नहीं कराया है उन्हें राजस्व विभाग के जरिए आपदा राहत मद से मुआवजा देने की बात कही जा रही है. मुआवजे को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं किए जाने के निर्देश हैं.

रबी सीजन के लिए धनधान्य योजना
आने वाले रबी सीजन को लेकर सरकार ने तैयार कर ली है. कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार यूपी में करीब 140 लाख हेक्टेयर भूमि पर रबी फसलों की बुवाई का टारगेट रखा गया है. जिसमें अकेले 100 लाख हेक्टेयर में गेहूं और बाकी हिस्से में दलहन औऱ तिलहन की खेती होगी. किसानों को समय पर खाद, पानी और सर्टिफाइड बीजों की किट मिल सके. इसके लिए अभी से रजिस्ट्रेशन और वितरण का काम शुरू कर दिया गया है.
इसके अलावा केंद्र सरकार की धनधान्य योजना को यूपी के चुनिंदा जिलों में मिशन मोड पर लागू कर दिया गया है. खेती को सिर्फ पारंपरिक तरीकों से निकाल कर आधुनिक बनाने के लिए फसल विविधीकरण और 50-50 हेक्टेयर के क्लस्टर बनाए जा रहे हैं. किसान सिर्फ एक ही फसल के भरोसे न रह कर आधुनिक तकनीकों और क्लस्टर फार्मिंग के जरिए अपनी कमाई को दोगुना कर सकते हैं.

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आधुनिक कृषि यंत्र और सस्ते लोन
खेती के लिए आज के वक्त में मशीनों की जरूरत बढ़ गई है और साथ ही नई तकनीकों की भी इनके लिए किासनों को पैसों की जरूरत होती है. इसका जिम्मा भी सरकार बखूबी उठा रही है. सरकार ने इस चुनावी दौर में कृषि यंत्रीकरण पर बहुत बड़ा फोकस किया है. किसानों को आधुनिक ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और ड्रोन जैसी तकनीक से जोड़ने के लिए भारी सब्सिडी और आसान किस्तों पर लोन का प्रावधान किया जा रहा है.
इसके अलावा कृषक समृद्धि योजना के तहत खेती के कामों के लिए बेहद कम ब्याज दरों पर फाइनेंस की सुविधा दी जा रही है जिससे छोटे किसानों को पैसों की तंगी न झेलनी पड़े. इसके अलावा गन्ने की पेराई के नए सत्र को शुरू करने से लेकर एमएसपी पर खरीद और अतिरिक्त बोनस जैसी उम्मीदों पर भी किसानों की नजर टिकी है. आपको बता दें यूपी में तकरीबन 2.50 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड किसान हैं जो चुनाव की दिशा तय करते हैं.
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