गांव में अक्सर लोग सांप का नाम सुनते ही लाठी उठा लेते हैं और उसे मारने दौड़ते हैं. लेकिन हर सांप इंसानों का दुश्मन नहीं होता. कुछ सांप ऐसे भी हैं जो इंसानों की मदद भी कर देते हैं. इन्हीं में से एक बेहद शांत और बिना जहर वाला सांप है सैंड बोआ जो कि चुपचाप मिट्टी के अंदर रहकर किसानों की फसलों की रखवाली करता है. इस सांप को बहुत सी जगहों पर दोमुंहा सांप भी कहा जाता है. देखने में इसकी पूंछ भी सिर की तरह गोल दिखती है. जिसकी वजह से लोग असमंजस में पड़ जाते हैं.
अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के चक्कर में तस्कर इसे करोड़ों का बताकर इसका शिकार करते हैं. जबकि ऐसा नहीं है यह सांप किसानों का सबसे वफादार दोस्त कहा जा सकता है. क्योंकि अगर खेत में सैंड बोआ सांप मौजूद है. तो यह फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों और चूहों का पूरी तरह सफाया कर देता है. यह किसी भी इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाता. बल्कि उल्टे खेत की मिट्टी को उपजाऊ और फसल को सेफ बनाए रखने में दिन-रात काम करता रहता है.
खेत की करता है रखवाली
खेतों में खड़ी फसल को सबसे ज्यादा नुकसान चूहे और छोटे-मोटे कीट पहुंचाते हैं. यह चूहों का झुंड रातभर में गेहूं, धान, मक्का या सब्जियों की जड़ों को काटकर बर्बाद कर देता है. किसान इन्हें मारने के लिए बाजार से महंगे और खतरनाक चूहा मार जहर लाते हैं. जिससे खेत की मिट्टी और फसल दोनों जहरीली होती हैं. सैंड बोआ यहां पर एक परफेक्ट बायोलॉजिकल पेस्ट कंट्रोलर की तरह काम करता है.
इसकी बनावट ऐसी होती है कि यह आसानी से चूहों के बिलों में सीधे घुस जाता है. यह चूहों, उनके बच्चों और छछूंदरों को निपटा देता है. जहां सैंड बोआ रहता है वहां चूहों की पूरी पॉपुलेशन कुछ ही हफ्तों में साफ हो जाती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान का जहरीली दवाओं पर होने वाला हजारों रुपये का खर्च बच जाता है और अनाज भी केमिकल फ्री रहता है.

मिट्टी की प्राकृतिक जुताई
सैंड बोआ ज्यादातर समय जमीन की ऊपरी और निचली सतह के बीच मिट्टी खोदकर रेंगता रहता है. इस आदत को बायोलॉजी में सबटेरेनियन बिहेवियर कहते हैं. जो खेती के लिए अच्छी साबित होती है. जब यह सांप मिट्टी के अंदर लगातार आगे बढ़ता है. तो वह मिट्टी को भुरभुरा और हल्का बना देता है. बिल्कुल वैसे ही जैसे केंचुए काम करते हैं. ठीक उसी तरह सैंड बोआ भी एक नैचुरल टिलर यानी हल की तरह खेत के अंदर काम करता है.
इससे मिट्टी के अंदर हवा और ऑक्सीजन का सर्कुलेशन बहुत शानदार हो जाता है. जिसे हम एयरेशन कहते हैं. मिट्टी हल्की होने से बारिश या सिंचाई का पानी जमीन में गहराई तक आसानी से सोख लिया जाता है. फसलों की जड़ों को फैलने के लिए पूरी जगह मिलती है. जिससे पौधे मजबूत होते हैं और पैदावार में सीधा इजाफा देखने को मिलता है.

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इसानों को नहीं पहुंचाता नुकसान
ग्रामीण इलाकों में सैंड बोआ को लेकर बहुत सारी कहानियां और अफवाहें फैली हुई हैं. जबकि असल बात यह है कि यह पूरी तरह नॉन-वेनॉमस यानी बिना जहर वाला सांप है. इसके काटने से किसी की जान जाने का कोई खतरा नहीं होता. स्वभाव से भी काफी शांत होता है इतना कि इंसानों की आहट सुनते ही मिट्टी में छिप जाता है. अंधविश्वास की वजह से तस्कर इसे पकड़कर बेचते हैं.
भारतीय वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत इसे पकड़ना या मारना गैरकानूनी है. अगर किसान इसे अपने खेत में सुरक्षित रहने दें तो न सिर्फ बायोडायवर्सिटी बनी रहती है. बल्कि फसलों को कीड़े-मकोड़ों से भी कुदरती सुरक्षा मिलती है. अगर आपको अपने खेत में कहीं नजर आए यह सांप को तो न इसे मारें और न ही भगाएं.
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