Backyard Poultry Farming: गांव में घर के आसपास थोड़ी खाली जगह है और आप उससे कुछ कमाई करना चाहते हैं, तो मुर्गी पालन एक अच्छा ऑप्शन बन सकता है. इसके लिए बड़े फार्म या ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती. घर के आंगन या खाली जगह में देसी मुर्गियां पालकर अंडों और मुर्गियों से आमदनी की शुरुआत की जा सकती है.
बैकयार्ड पोल्ट्री यानी घर के आसपास मुर्गी पालन की सबसे बड़ी खासियत ये है की ये तरीका महिलाओं और छोटे किसानों के लिए भी काम आ सकता है. हालांकि, कमाई इस बात पर निर्भर करेगी कि आप किस नस्ल की मुर्गियां पालते हैं, उनकी देखभाल कैसी करते हैं और आपके इलाके में अंडों की मांग कितनी है.
कड़कनाथ: अंडों के साथ मांस की भी मांग
कड़कनाथ अपने खास काले रंग और बाजार में मिलने वाली अच्छी कीमत के लिए जानी जाती है. यह नस्ल साल में करीब 80 अंडे देती है. इसके नर का वजन लगभग 1.6 किलो और मादा का 1.12 किलो होता है. यह करीब छह महीने की उम्र में अंडे देना शुरू कर सकती है. इसे पालने से पहले अपने इलाके में इसके अंडों और मांस की मांग जरूर पता कर लें.
अंकलेश्वर और उत्तरा नस्ल:
गुजरात के भरूच और नर्मदा जिलों में पाली जाने वाली अंकलेश्वर नस्ल साल में करीब 70 से 80 अंडे देती है. इसकी मादा का वजन लगभग 1.6 किलो और नर का करीब 1.8 किलो होता है. यह लगभग छह महीने की उम्र में अंडे देना शुरू कर देती है. उत्तराखंड में पाली जाने वाली उत्तरा नस्ल देसी मुर्गी पालन के लिए एक विकल्प है. इसकी मादा मुर्गी का वजन करीब 1.12 किलो होता है. यह साल में लगभग 137 अंडे दे सकती है.
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निकोबारी: साल में 148 से ज्यादा अंडे
निकोबारी नस्ल का संबंध अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से है. यह साल में 148 से ज्यादा अंडे देने की क्षमता रखती है. इसकी मादा का वजन करीब 1.3 किलो और नर का वजन लगभग 1.8 किलो होता है. यह नस्ल करीब सात महीने की उम्र में अंडे देना शुरू करती है.
कश्मीर फेवरोला और पंजाब ब्राउन:
कश्मीर फेवरोला नस्ल साल में करीब 70 से 75 अंडे दे सकती है. यह लगभग सात महीने की उम्र में अंडे देना शुरू करती है. इसे चुनने से पहले अपने इलाके के मौसम और इसकी उपलब्धता की जानकारी जरूर लें. पंजाब और हरियाणा में पाली जाने वाली पंजाब ब्राउन नस्ल भी बैकयार्ड पोल्ट्री के लिए एक विकल्प है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह साल में करीब 70 अंडे देती है.
मुर्गियां पालने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
देसी मुर्गियों की नस्ल चुनने से पहले अपने इलाके के मौसम और बाजार की जानकारी जुटाएं. उनके रहने के लिए सूखी, साफ और सुरक्षित जगह बनाएं, जहां बारिश और दूसरे जानवरों से बचाव हो सके. समय पर टीकाकरण, साफ पानी और सही आहार का भी ध्यान रखें. शुरुआत में कम मुर्गियों से काम शुरू करना बेहतर हो सकता है. इससे देखभाल का अनुभव मिलेगा और खर्च संभालना भी आसान रहेगा.
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