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MSP पर कैसे बेचें अपनी फसल, किसान जान लें खेत से मंडी तक पूरा प्रॉसेस

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ABP News
October 3, 2026•3 min read
MSP पर कैसे बेचें अपनी फसल, किसान जान लें खेत से मंडी तक पूरा प्रॉसेस

फसल तैयार होने के बाद किसान के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि फसल कहां बेचना सही होगा और इसके सही दाम कैसे मिलेंगे? ऐसे में Minimum Support Price यानी MSP का नाम सबसे पहले सामने आता है. सरकार 22 अनिवार्य कृषि फसलों के लिए MSP तय करती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर फसल हर मंडी में सीधे सरकार MSP पर खरीदती है.

सरकारी खरीद संबंधित फसल, राज्य, मौसम और लागू खरीद व्यवस्था के तहत निर्धारित एजेंसियों और केंद्रों के जरिए होती है. ऐसे में अगर आप अपनी फसल के सही दाम चाहते हैं और MSP पर अपनी फसल बेचने की केशिश कर रहे हैं, तो जानिए इससे जुड़ा हर जरूरी स्टेप और प्रोसेस की पूरी जानकारी.

MSP वाली है या नहीं

फसल बेचने से पहले किसान को यह जांचना चाहिए कि उसकी फसल उस सीजन की MSP सूची में शामिल है या नहीं. इसके बाद अपने जिले में सरकारी खरीद केंद्र, संबंधित APMC मंडी और खरीद की तारीखों की जानकारी लेना जरूरी है. खासकर दालों और तिलहनों जैसी फसलों में खरीद के लिए पंजीकरण और निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन जरूरी होता है. PM-AASHA के तहत अधिसूचित दालों, तिलहनों और कोपरा की FAQ गुणवत्ता वाली उपज की खरीद राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के अनुरोध पर निर्धारित अवधि में की जाती है.

रजिस्ट्रेशन में गलती न करें

सरकारी खरीद में किसान का पंजीकरण एक अहम और जरूरी स्टेप है. इसके लिए अलग-अलग फसलों और राज्यों में प्रोसेस अलग होती है, इसलिए किसान को राज्य के कृषि विभाग, मंडी या संबंधित खरीद एजेंसी के निर्देशों के अनुसार पंजीकरण कराना चाहिए. आमतौर पर किसान से पहचान, जमीन और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है. अगर किसान e-NAM से जुड़ी मंडी में बिक्री करना चाहता है, तो वह किसान के रूप में पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर सकता है और संबंधित APMC का चयन कर सकता है. KYC के बाद आवेदन APMC की मंजूरी के लिए भेजा जाता है.

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उपज तैयार करना भी जरूरी

कटाई के बाद फसल को ठीक से सुखाना, साफ करना और निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार तैयार करना जरूरी है. मंडी में पहुंचने पर उपज की एंट्री होती है और कई e-NAM मंडियों में गुणवत्ता की जांच यानी assaying की सुविधा होती है. गुणवत्ता के आधार पर बोली प्रोसेस में कीमत तय होने में मदद मिलती है.

तौल के बाद पैमेंट का इंतजार

बोली या सरकारी खरीद पूरी होने के बाद उपज की तौल और बिलिंग होती है. e-NAM व्यवस्था में पैमेंट ऑनलाइन माध्यमों से किया जा सकता है और किसान अपने लेनदेन की स्थिति देख सकता है. सरकारी MSP खरीद में पैमेंट की व्यवस्था संबंधित खरीद एजेंसी के नियमों के अनुसार होती है. इसलिए किसान को बैंक खाता सही रखना और बिक्री की रसीद, तौल पर्ची व अन्य दस्तावेज संभालकर रखना चाहिए.

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