How To Start Poultry Business: अगर आप भी खेती-बारी के साथ अपना काम शुरू करना चाहते हैं तो मुर्गी पालन एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. अंडे और चिकन की डिमांड बाजार में सालभर बनी रहती है. ऐसे में इस कारोबार से आप सालभर कमाई कर सकते हैं. इतना ही नहीं इस बिजनेस की शुरू करने के लिए आपको सरकार की तरफ से आर्थिक मदद भी मिल सकती है.
हालांकि, बहुत से लोगों को यह नहीं पता होता है कि, किस तरह के पोल्ट्री फार्म पर सब्सिडी मिल सकती है और इसके लिए क्या शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं. ऐसे में फार्म शुरू करने से पहले योजना के सभी नियमों को समझना जरूरी है.
मुर्गी पालन पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) योजना के तहत ग्रामीण मुर्गी पालन से जुड़े कुछ खास कामों के लिए 50 फीसदी तक सब्सिडी दी जाती है. इसमें ग्रामीण मुर्गियों की अच्छी नस्ल तैयार करने के लिए ब्रीडिंग फार्म, हैचरी और चूजों को शुरुआती दिनों में पालने की यूनिट लगाना शामिल है. इस योजना में मुर्गी पालन प्रोजेक्ट के लिए अधिकतम 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है.
हालांकि, यह मदद हर तरह के मुर्गी फार्म के लिए नहीं है. यानी अगर कोई व्यक्ति सिर्फ मांस या अंडे के लिए सामान्य ब्रायलर या लेयर फार्म खोलना चाहता है तो उसे इस योजना के तहत अपने आप सब्सिडी नहीं मिलेगी. योजना में ग्रामीण मुर्गियों की नस्ल सुधारने और चूजे तैयार करने से जुड़े कामों को मदद दी जाती है.
कौन ले सकता है योजना का फायदा?
इस योजना का फायदा कोई भी योग्य व्यक्ति, किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG), संयुक्त देयता समूह, किसान सहकारी संगठन और सेक्शन 8 कंपनी ले सकती है. इसके लिए आवेदक के पास फार्म लगाने के लिए अपनी जमीन होनी चाहिए या फिर वैध लीज पर जमीन ली होनी चाहिए. आवेदक को मुर्गी पालन का अनुभव होना चाहिए या इस काम के लिए जरूरी ट्रेनिंग ली होनी चाहिए. अगर उसके पास खुद का अनुभव नहीं है तो वह प्रोजेक्ट चलाने के लिए प्रशिक्षित लोगों या तकनीकी जानकारों की मदद ले सकता है.
यह भी पढ़ें: गांव में करना है डेयरी बिजनेस, जानें सरकर से कैसे मिलेगी मदद
सब्सिडी पाने के लिए क्या हैं जरूरी शर्तें?
योजना के तहत ग्रामीण पोल्ट्री ब्रीडिंग यूनिट लगाने के लिए कम से कम 1,000 मूल मुर्गियों की व्यवस्था करनी होती है. इसमें हैचरी और ब्रूडर-कम-मदर यूनिट भी शामिल होती है, जहां अंडों से चूजे तैयार किए जाते हैं और उन्हें शुरुआती चार हफ्तों तक पाला जाता है.
प्रोजेक्ट की बाकी लागत आवेदक को खुद या बैंक से लोन लेकर जुटानी होती है. बैंक से लोन लेने पर बैंक आवेदक की आर्थिक स्थिति, लोन चुकाने की क्षमता और दूसरे जरूरी दस्तावेजों की जांच करता है. जमीन खरीदने, किराये पर लेने या निजी इस्तेमाल की गाड़ी खरीदने जैसे खर्चों पर सब्सिडी नहीं मिलती.
कहां और कैसे करें आवेदन?
इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन राष्ट्रीय पशुधन मिशन के पोर्टल nlm.udyamimitra.in पर किया जा सकता है. आवेदन के बाद राज्य सरकार की एजेंसी प्रोजेक्ट की जांच करती है. इसके बाद बैंक से लोन की मंजूरी और संबंधित अधिकारियों की स्वीकृति मिलने पर सब्सिडी की प्रक्रिया आगे बढ़ती है. सब्सिडी की रकम एक साथ नहीं, बल्कि तय शर्तें पूरी करने और जरूरी दस्तावेज जमा करने के बाद किस्तों में जारी की जाती है.
यह भी पढ़ें: किसानों को अब मिलेगा 22 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा, सरकार का बड़ा ऐलान
