Agriculture

SAT-1 Virus: खुरपका-मुंहपका के नए स्ट्रेन SAT-1 को लेकर अलर्ट, पशुओं के लिए यह कितना खतरनाक?

N
ABP News
November 7, 2026•3 min read
SAT-1 Virus: खुरपका-मुंहपका के नए स्ट्रेन SAT-1 को लेकर अलर्ट, पशुओं के लिए यह कितना खतरनाक?

खुरपका-मुंहपका रोग यानी फुट एंड माउथ डिजीज FMD का नया सीरोटाइप SAT-1 भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. यह वायरस गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और सूअर जैसे पशुओं को संक्रमित करता है. राहत की बात यह है कि अभी तक भारत में SAT-1 का कोई मामला सामने नहीं आया है. हालांकि, चीन और मंगोलिया समेत कई देशों में इसके मामले मिलने के बाद सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है. इसके खतरे को देखते हुए बीते दिनों बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्तर की तैयारी एक्सरसाइज आयोजित की गई, जिसका मकसद बीमारी की जल्द पहचान करना और संक्रमण मिलने पर उसे फैलने से रोकना है.

क्यों खतरनाक माना जा रहा है SAT-1?

खुरपका-मुंहपका वायरस के सात मुख्य सीरोटाइप होते हैं- O, A, C, SAT-1, SAT-2, SAT-3 और Asia-1. इनकी एक खास बात यह है कि किसी एक सीरोटाइप के खिलाफ बनी इम्युनिटी दूसरे सीरोटाइप से सुरक्षा नहीं देती. यानी अगर किसी पशु को सामान्य FMD के टीके लगे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह SAT-1 से भी सुरक्षित है. भारत में अभी इस्तेमाल होने वाली FMD वैक्सीन SAT-1 के खिलाफ सुरक्षा नहीं देती. इसलिए इस नए सीरोटाइप के आने पर पशुओं में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है. यही वजह है कि वैज्ञानिक और पशु चिकित्सा विभाग इसके लिए वैक्सीन तैयार करने और जरूरी इंतजाम करने पर भी काम कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें : Sugarcane Farmers: कर्नाटक में चीनी की MSP को लेकर विवाद, क्या मांग कर रहे किसान?

संक्रमित होने पर पशुओं में दिखते हैं ये लक्षण

SAT-1 भी खुरपका-मुंहपका वायरस का ही एक सीरोटाइप है. इससे संक्रमित पशुओं को तेज बुखार आता है. उनके मुंह, जीभ, मसूड़ों और खुरों के आसपास छाले या घाव बनते हैं. इन घावों की वजह से पशुओं को चलने और चारा खाने में परेशानी होती है. कई बार वे खाना-पीना भी कम कर देते हैं. यह बीमारी संक्रमित पशु के सीधे संपर्क से फैलती है. इसके अलावा दूषित चारे, पानी, बर्तनों, वाहनों और जूतों के जरिए भी वायरस एक जगह से दूसरी जगह पहुंच सकता है. इससे दूध उत्पादन में गिरावट आती है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान होता है. छोटे पशुओं में गंभीर संक्रमण होने पर मौत का खतरा भी रहता है.

सरकार ने क्या तैयारी की और पशुपालक क्या करें?

केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने ICAR-NIVEDI के साथ मिलकर बेंगलुरु में दो दिवसीय ‘वज्र-सैट’ अभ्यास आयोजित किया. इसमें 25 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 83 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. इस दौरान बीमारी की जल्द पहचान, लैब में जांच, पशुओं की आवाजाही पर नियंत्रण और संक्रमण मिलने पर तुरंत कार्रवाई जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. पशुपालकों को भी अपने स्तर पर सावधानी रखनी चाहिए. किसी पशु में बुखार, मुंह में छाले या लंगड़ापन दिखे तो उसे तुरंत दूसरे पशुओं से अलग करें और नजदीकी पशु चिकित्सक को सूचना दें.

यह भी पढ़ें : Brinjal Farming: बैंगन के पौधे सूख रहे हैं और फलन घट रहा है? अपनाएं ये आसान तरीके

Topics & Tags:#Agriculture
SAT-1 Virus: खुरपका-मुंहपका के नए स्ट्रेन SAT-1 को लेकर अलर्ट, पशुओं के लिए यह कितना खतरनाक? | Kisan Reporter