Singhare Ki Kheti: क्या आप भी सिंघारे की खेती से मोटा मुनाफा कमाना चाहते हैं लेकिन अपना तालाब न होने की वजह से परेशान हैं? अगर हां तो ये खबर आपके लिए है. सिंघाड़े की खेती के लिए आप किसी दूसरे का तालाब ठेके पर लेकर भी खेती शुरू कर सकते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि लगभग 120 से 150 में इसकी फसल तैयार हो जाती है. बाजार में इसकी डिमांड भी अच्छी रहती है.
सिंघाड़े की खेती करने के लिए किसान के पास खुद का तालाब होना जरूरी नहीं है. अगर आसपास किसी का तालाब खाली है, तो उसे ठेके पर लेकर खेती की जा सकती है. कुछ किसान पिछले कई सालों से इसी तरीके से सिंघाड़े की खेती कर रहे हैं. शुरुआत में इस फसल की ज्यादा जानकारी न होने पर भी धीरे-धीरे अनुभव के साथ खेती करना आसान हो जाता है.
बीज से ऐसे तैयार करें सिंघाड़े की नर्सरी
सिंघाड़े की खेती में सबसे पहले नर्सरी तैयार की जाती है. इसके लिए बीजों को तीन से पांच दिन तक पानी में भिगोकर रखा जाता है, ताकि उनमें अंकुर निकल सकें. जब पौधे करीब 3 इंच से 1 फीट तक लंबे हो जाते हैं, तब उन्हें तालाब में लगाया जा सकता है. नर्सरी तैयार करते समय पौधों को अच्छी देखभाल की जरूरत होती है. कमजोर या खराब पौधों को तालाब में लगाने से बचना चाहिए.
120 से 150 दिन में तैयार हो जाती है फसल
तालाब में पौधे लगाने के करीब 120 से 150 दिन बाद सिंघाड़े की फसल तैयार होने लगती है. इसकी बेल पानी की सतह पर फैलती है और कुछ समय बाद उसमें फल आने शुरू हो जाते हैं. फल पकने के बाद बाजार की मांग और उनकी हालत देखकर तुड़ाई की जाती है. इस दौरान बेलों पर नजर रखना जरूरी है, ताकि फसल में किसी तरह की परेशानी होने पर समय रहते उसका ध्यान रखा जा सके.
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सिंघाड़े की इन किस्मों पर कर सकते हैं विचार
अच्छी फसल के लिए किसान लाल चिकनी गुल्ली, लाल गठुआ और हरीरी गठुआ जैसी किस्मों के बारे में जानकारी ले सकते हैं. हालांकि, कौन सी किस्म आपके तालाब और इलाके के लिए सही रहेगी, यह वहां के मौसम, पानी और मिट्टी की स्थिति पर निर्भर करता है. इसलिए बीज खरीदने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा.
तालाब की सफाई और पानी का रखें ध्यान
- सिंघाड़े की खेती शुरू करने से पहले तालाब की अच्छी तरह सफाई कर लें.
- इससे खरपतवार की परेशानी कम हो सकती है.
- खेती के दौरान तालाब में कम से कम 5 फीट पानी बनाए रखने की सलाह दी जाती है.
- इसके साथ ही पौधों में कीट और बीमारी के लक्षण दिखने पर समय रहते उचित उपाय करें.
1800 रुपये क्विंटल तक मिल सकता है भाव
सिंघाड़े का थोक रेट करीब 1800 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल सकती है. हालांकि, बाजार में आवक, मांग और फल की क्वालिटी के हिसाब से भाव बदल सकता है. इस खेती में तालाब का ठेका, बीज, मजदूरी, तुड़ाई और बाजार तक पहुंचाने का खर्च भी जोड़ना होगा.
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