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साधारण आलू से ज्यादा पौष्टिक है ये बैंगनी आलू! 35 टन तक होगी पैदावार

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ABP News
October 28, 2026•3 min read
साधारण आलू से ज्यादा पौष्टिक है ये बैंगनी आलू! 35 टन तक होगी पैदावार

Kufri Jamunia Potato: आलू लगभग हर घर की रसोई में इस्तेमाल होता है. कभी सब्जी तो कभी पराठे और पकौड़े में इसका स्वाद लिया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि, अब आलू की एक ऐसी किस्म भी आ गई है, जो दिखने में बैंगनी और साधारण आलू के मुकाबले ज्यादा पोषक तत्व देती है? खास बात यह है कि, इसकी खेती किसानों के लिए भी काफी फायदेमंद हो सकती है. इस किस्म का नाम 'कुफरी जमुनिया' है, जिसे भारतीय कृषि वैज्ञानिकों ने तैयार किया है.

कुफरी जमुनिया आलू की एक खास किस्म है, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने विकसित किया है. इसे साल 2024 में जारी किया गया था. इस पहचान इसका बैंगनी रंग है. इसमें साधारण आलू के मुकाबले कुछ जरूरी पोषक तत्व ज्यादा पाए जाते हैं.

साधारण आलू से कितना ज्यादा पौष्टिक?

कुफरी जमुनिया में विटामिन सी, आयरन और जिंक जैसे जरूरी पोषक तत्व मौजूद हैं. इसके 100 ग्राम हिस्से में करीब 42.75 मिलीग्राम विटामिन सी पाया गया है, जबकि साधारण आलू में यह मात्रा लगभग 23.15 मिलीग्राम है. इसके अलावा 100 ग्राम कुफरी जमुनिया में 3.22 मिलीग्राम आयरन और 2.28 मिलीग्राम जिंक मिलता है. इसमें एंथोसायनिन नाम का प्राकृतिक तत्व भी मौजूद है, जो आलू को बैंगनी रंग देता है और शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है.

एक हेक्टेयर में कितनी होगी पैदावार?

किसानों के लिए अच्छी बात यह है कि कुफरी जमुनिया की पैदावार भी अच्छी हो सकती है. सरकार के मुताबिक, इसकी खेती उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के लिए सुझाई गई है. परीक्षण के दौरान 90 दिनों में इस किस्म से करीब 49 टन प्रति हेक्टेयर उत्पादन मिला था. हालांकि, सामान्य खेती में इसकी अनुमानित पैदावार 32 से 35 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है. परीक्षण में करीब 90 प्रतिशत आलू बाजार में बेचने लायक पाए गए थे.

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लंबे समय तक रख सकते हैं सुरक्षित

कुफरी जमुनिया की एक और खासियत इसकी अच्छी भंडारण क्षमता है. सही तापमान और देखभाल मिलने पर इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इससे किसानों को फसल कटते ही बेचने की मजबूरी कम हो सकती है.

खेती में क्या आ सकती है परेशानी?

फिलहाल किसानों के सामने इस किस्म के अच्छे बीज मिलना एक चुनौती हो सकती है. नई किस्म होने के कारण इसके बीज हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं होंगे. इसलिए किसान बुवाई से पहले कृषि विभाग या आलू अनुसंधान संस्थान से बीज की उपलब्धता की जानकारी जरूर लें.

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