Agriculture Machinery Market: आज के समय में खेती सिर्फ हल और बैलों के भरोसे नहीं रह गई है. खेत तैयार करने से लेकर बीज बोनो और फसल काटने तक मशीनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. यही वजह है कि, देश में कृषि मशीनरी का कारोबार भी बढ़ता ही जा रहा है.
ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, रोटावेटर और दूसरी मशीनों बनाने वाली कंपनियां हर साल हजारों करोड़ रुपये का कारोबार कर रही हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि, भारत में कृषि मशीनों का बाजार कितना बड़ा है और इससे हर साल कितने रुपये की कमाई होती है? आइए जानते हैं.
देश में कितने करोड़ का है कृषि यंत्रों का कारोबार?
मार्केट रिसर्च कंपनी IMARC Group की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में भारत का कृषि मशीनों (Agriculture Machines) का बाजार करीब 1.34 लाख करोड़ रुपये का था. यानी एक साल में देश में इतनी कीमत के कृषि यंत्रों का बाजार रहा. इसमें ट्रैक्टर के अलावा खेती में इस्तेमाल होने वाली कई तरह की मशीनें शामिल हैं.
हर साल कितने ट्रैक्टर बिकते हैं?
कृषि मशीनों में ट्रैक्टर की मांग सबसे ज्यादा है. महिंद्रा एंड महिंद्रा की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में देश में करीब 9.39 लाख ट्रैक्टर (Tractor Sales) बिके. यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 7.3 प्रतिशत ज्यादा था. इससे समझा जा सकता है कि किसान खेती के काम आसान बनाने के लिए मशीनों पर लगातार पैसा खर्च कर रहे हैं.
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किन कृषि यंत्रों की सबसे ज्यादा मांग?
ट्रैक्टर के अलावा रोटावेटर, सीड ड्रिल, पावर टिलर, स्प्रे मशीन और हार्वेस्टर की भी अच्छी मांग है. रोटावेटर से खेत तैयार होता है, सीड ड्रिल से बीज बोना आसान होता है और हार्वेस्टर से फसल जल्दी काटी जा सकती है. इन मशीनों से किसानों का समय बचता है और मजदूरों पर निर्भरता भी कम होती है.
आने वाले सालों में कितना बढ़ेगा कारोबार?
IMARC Group का अनुमान है कि, साल 2034 तक भारत का कृषि उपकरण बाजार करीब 2.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. इसका मतलब है कि आने वाले सालों में मशीनें बनाने वाली कंपनियों, डीलरों और मरम्मत का काम करने वालों के लिए कारोबार के नए मौके बन सकते हैं.
किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
कृषि मशीनों का बढ़ता बाजार किसानों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है. जिन किसानों के पास मशीन खरीदने का बजट नहीं है, वे किराये पर मशीन लेकर खेती कर सकते हैं. वहीं, गांव में कृषि यंत्र किराये पर देने का काम भी कमाई का जरिया बन सकता है. हालांकि, इससे होने वाली कमाई मशीन की कीमत, किराये, डीजल, मरम्मत और काम मिलने पर निर्भर करेगी.
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