Maharashtra Drought Crisis: महाराष्ट्र में सूखे और पानी की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. खेत में खड़ी फसलें सूखने लगी है जिससे किसानों को घर खर्च चलाने से लकर बच्चों की पढ़ाई तक, कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. फसल नुकसान से कमाई की उम्मीद टूटने पर कई किसान परिवारों को आने वाले दिनों की चिंता सता रही है. ऐसे में किसान आत्महत्या की खबरें भी सामने आ रही हैं.
सूखे के इस संकट के बीच महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने सूखे से प्रभावित किसानों की मदद के लिए कदम उठाया है. उप मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए 100 टन खाद्यान्न की पहली खेप भेजी है. इसे उन्होंने दिवाली का तोहफा बताते हुए आगे भी मदद जारी रखने की बात कही है.
पानी की कमी से खेती पर असर
महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों के लिए खेती करना मुश्किल होता जा रहा है. खेतों में नमी और पानी की कमी के कारण फसलें सूख रही हैं. इससे किसानों की आमदनी पर असर पड़ने के साथ परिवार का खर्च चलाने की चिंता भी बढ़ गई है. किसानों को डर है कि, अगर फसल से कमाई नहीं हुई, तो घर की जरूरतें कैसे पूरी होंगी.
एकनाथ शिंदे ने अपनी दशहरा रैली के दौरान किसानों की इन परेशानियों का जिक्र किया. उन्होंने पिछले साल भारी बारिश से हुए नुकसान को भी याद किया. उस समय कई जगह खेतों और फसलों को नुकसान पहुंचा था, जबकि पशुपालकों को भी मवेशियों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा था. शिंदे ने कहा कि शिवसेना उस समय भी किसानों के साथ थी और आगे भी उनकी मदद करने की कोशिश करेगी.
बच्चों की पढ़ाई और शादी के खर्च में भी मदद
किसानों की परेशानी सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है. फसल खराब होने पर घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में बच्चों की स्कूल-कॉलेज की फीस भरना और परिवार में शादी जैसे जरूरी काम करना भी चिंता का कारण बन जाता है.
शिंदे के मुताबिक, किसानों से मुलाकात के दौरान कई परिवारों ने अपनी परेशानियां उनके सामने रखी थीं. कुछ लोगों को बच्चों की पढ़ाई की चिंता थी, तो कुछ परिवार शादी के खर्च को लेकर परेशान थे. उन्होंने ऐसे परिवारों को भरोसा दिलाया कि उनकी मदद के लिए भी प्रयास किए जाएंगे. खाद्यान्न की पहली खेप भेजने के साथ उन्होंने आने वाले दिनों में और राशन भेजने की बात कही.
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आत्महत्या जैसे कदम न उठाएं किसान
शिंदे ने किसानों से अपील की कि वे मुश्किल हालात में हिम्मत न हारें और आत्महत्या जैसा कदम न उठाएं. उन्होंने कहा कि वे खुद को किसान का बेटा मानते हैं और किसानों की परेशानी समझते हैं. उनके मुताबिक, कुछ किसानों ने मुलाकात के दौरान भरोसा जताया था कि वे अब ऐसा कदम नहीं उठाएंगे.
“सिर्फ भाषण नहीं, राशन भी देता हूं”
दशहरा रैली के दौरान शिंदे ने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों की मदद सिर्फ भाषण देने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ भाषण नहीं देता, किसानों को राशन भी देता हूं.” शिंदे ने यह भी कहा कि, आगे खाद्यान्न की और खेप भेजी जाएगी. हालांकि, सूखे से जूझ रहे किसानों को राहत पहुंचाने के लिए ऐसी मदद कितनी और कब तक मिलेगी, यह आने वाले समय में साफ होगा.
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