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भारी बारिश से धान की फसल को नुकसान, किसान तुरंत करें ये काम

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ABP News
September 28, 2026•3 min read
भारी बारिश से धान की फसल को नुकसान, किसान तुरंत करें ये काम

देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार भारी बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बहुत बढ़ा दी है. खेतों में इस समय धान की फसल पूरी तरह पककर तैयार खड़ी है, लेकिन अचानक हुए इस मौसम बदलाव के कारण पकी हुई फसल खेतों में ही जमीन पर बिछ गई है. खेतों में पानी भरने की वजह से धान की बालियां डूब रही हैं, जिससे दानों के सड़ने और फसल की गुणवत्ता खराब होने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है. ऐसी स्थिति में किसानों को घबराने के बजाय तुरंत कुछ बेहद जरूरी कदम उठाने चाहिए, ताकि अपनी महीनों की मेहनत को बर्बाद होने से बचाया जा सके.

खेत से तुरंत निकालें अतिरिक्त पानी

बारिश रुकते ही किसानों को सबसे पहला काम अपने खेतों में जमा हुए अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने का करना चाहिए. इसके लिए खेत की मेड़ के पास जरूरत के हिसाब से छोटी नालियां बनाएं, ताकि पानी आसानी से बहकर बाहर निकल जाए. धान के खेत में अगर 24 से 48 घंटे से ज्यादा समय तक पानी भरा रहता है, तो पौधों की जड़ें गलने लगती हैं और फंगस का खतरा बहुत बढ़ जाता है.

गिरी हुई बालियों को संभालें

तेज हवा के कारण जिन खेतों में धान की खड़ी फसल नीचे गिर गई है, वहां विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. खेत से पानी निकलने के बाद जमीन पर गिरी हुई धान की बालियों को कीचड़ और पानी से बचाने के लिए मजदूरों की मदद से तुरंत सीधा करने या सूखी जगह पर रखने का प्रयास करें. अगर फसल पूरी तरह पक चुकी है, तो पानी वाले खेत में कम्बाइन हार्वेस्टर मशीन ले जाने के बजाय मजदूरों से ही कटाई करवाएं. कटी हुई बालियों को किसी ऊंचे और सूखे स्थान पर इकट्ठा करें ताकि वे दोबारा गीली न हों.

धूप में दानों को अच्छी तरह सुखाएं

गीली या नमी वाली धान की फसल को सीधे बोरी में भरकर रखने की गलती बिल्कुल न करें. पानी के संपर्क में आने के कारण दानों में नमी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे दाने काले पड़ सकते हैं या उनमें अंकुरण शुरू हो सकता है. फसल की कटाई या मड़ाई के बाद, धान को साफ फर्श या तिरपाल पर फैलाकर कम से कम दो से तीन दिनों तक अच्छी तरह धूप में सुखाएं. जब दानों की नमी पूरी तरह खत्म हो जाए, तभी उन्हें भंडारण या मंडी में बेचने के लिए तैयार करें.

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फसल बीमा क्लेम की प्रक्रिया अपनाएं

जिन किसान भाइयों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी धान की फसल का बीमा कराया हुआ है, वे नुकसान की भरपाई के लिए तुरंत आवेदन कर सकते हैं. नियम के मुताबिक, प्राकृतिक आपदा या बेमौसम बारिश से फसल खराब होने के 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना बीमा कंपनी, स्थानीय कृषि अधिकारी या क्रॉप इंश्योरेंस ऐप के माध्यम से देना जरूरी होता है. समय पर सूचना देने से कृषि विभाग की टीम आपके खेत का सर्वे करेगी और आपको हुए नुकसान का उचित मुआवजा बैंक खाते में मिल सकेगा.

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