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सोलर पंप लगाने पर सरकार से कितनी मदद मिलती है? जानें योजना के नियम

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ABP News
September 28, 2026•3 min read
सोलर पंप लगाने पर सरकार से कितनी मदद मिलती है? जानें योजना के नियम

खेती में सिंचाई के लिए डीजल और बिजली पर होने वाला खर्च किसानों के लिए बड़ी चिंता रहती है. ऐसे में सोलर पंप सिंचाई की लागत कम करने का एक विकल्प है. केंद्र सरकार की पीएम-कुसुम योजना के तहत किसानों को सोलर कृषि पंप लगाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है. सामान्य राज्यों में केंद्र की ओर से 30 प्रतिशत और राज्य सरकार की ओर से कम से कम 30 प्रतिशत सहायता का प्रावधान है. बाकी अधिकतम 40 प्रतिशत राशि किसान को देनी होती है.

केंद्र सरकार देती है 30 प्रतिशत तक सहायता

पीएम-कुसुम योजना के कंपोनेंट-बी के तहत ऐसे इलाकों में स्टैंड-अलोन सोलर एग्रीकल्चर पंप लगाने के लिए सहायता दी जाती है, जहां ग्रिड इलेक्ट्रिसिटी उपलब्ध नहीं है. सामान्य राज्यों में केंद्र सरकार की सेंट्रल फाइनेंशियल असिस्टेंस यानी सीएफए पंप की बेंचमार्क कॉस्ट या टेंडर कॉस्ट, जो भी कम हो, उसका 30 प्रतिशत देती है.इसके अलावा राज्य सरकार को कम से कम 30 प्रतिशत सब्सिडी देनी होती है. इस तरह केंद्र और राज्य की सहायता मिलाकर कम से कम 60 प्रतिशत सहायता का प्रावधान रहता है. बाकी अधिकतम 40 प्रतिशत राशि किसान के हिस्से में आती है. हालांकि राज्य सरकार अपनी ओर से 30 प्रतिशत से ज्यादा सहायता देती है तो किसान का हिस्सा और कम हो जाता है.

किसान को कितने रुपये देने होते हैं?

किसान के हिस्से की अधिकतम 40 प्रतिशत राशि के लिए बैंक फाइनेंस की सुविधा भी ली जा सकती है. योजना के नियमों के अनुसार किसान शुरुआत में कुल लागत का करीब 10 प्रतिशत भुगतान कर सकता है और बाकी हिस्से में अधिकतम 30 प्रतिशत तक बैंक लोन के जरिए दिया जा सकता है.उदाहरण के लिए अगर किसी सोलर पंप की मान्य लागत 2 लाख रुपये मानी जाए तो 30 प्रतिशत केंद्र की सहायता यानी 60 हजार रुपये और कम से कम 30 प्रतिशत राज्य सहायता यानी 60 हजार रुपये होती है. इस स्थिति में बाकी 80 हजार रुपये किसान के हिस्से में आते हैं. इसमें बैंक से मिलने वाली वित्तीय सुविधा के नियम लागू होते हैं. यह केवल समझने के लिए उदाहरण है. वास्तविक राशि पंप की मान्य लागत और राज्य की योजना के अनुसार तय होती है.

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किन किसानों को मिलती है योजना की सुविधा?

पीएम-कुसुम के कंपोनेंट-बी में स्टैंड-अलोन सोलर एग्रीकल्चर पंप के लिए 7.5 एचपी तक की क्षमता वाले पंपों को सहायता देने का प्रावधान है. योजना का लाभ लेने के लिए किसान को अपने राज्य की संबंधित इम्प्लीमेंटिंग एजेंसी के जरिए आवेदन करना होता है. अलग-अलग राज्यों में आवेदन की प्रक्रिया, उपलब्ध पंपों की संख्या, किसान की पात्रता और अतिरिक्त सब्सिडी के नियम अलग हो सकते हैं.

किसानों को आवेदन करने से पहले अपने राज्य के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट, रिन्यूएबल एनर्जी डिपार्टमेंट या पीएम-कुसुम की संबंधित स्टेट इम्प्लीमेंटिंग एजेंसी से जानकारी लेनी चाहिए. केंद्र सरकार की सहायता सीधे हर किसान को एक समान नकद राशि के रूप में नहीं दी जाती, बल्कि पात्र सोलर पंप की लागत में सब्सिडी के रूप में समायोजित की जाती है. इसलिए सोलर पंप लगवाने से पहले किसान को पंप की क्षमता, कुल लागत, केंद्र की सहायता, राज्य की सब्सिडी और अपनी हिस्सेदारी का पूरा हिसाब जरूर देखना चाहिए.

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