देश में बड़ी संख्या में परिवार खेती के साथ पशुपालन से भी अपनी कमाई चलाते हैं. ऐसे में गाय, भैंस, बकरी, भेड़ या दूसरे पशुओं का नुकसान होने पर परिवार की आमदनी पर सीधा असर पड़ सकता है. इसी आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए सरकार की ओर से पशुधन बीमा की सुविधा दी जाती है. अब इस बीमा व्यवस्था को और आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार पशुधन बीमा पोर्टल लाई है.
इस पोर्टल के जरिए बीमा से जुड़े कई काम डिजिटल तरीके से एक जगह किए जा सकेंगे. सरकार के अनुसार, इसका मकसद बीमा की प्रक्रिया को ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाना है. पोर्टल पर पॉलिसी, क्लेम और योजना की निगरानी से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी.
बीमा से जुड़े कई काम एक ही जगह होंगे
नए पोर्टल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पशुधन बीमा से जुड़े अलग-अलग कामों को एक ही डिजिटल मंच पर संभालने में मदद मिलेगी. इसमें बीमा पॉलिसी से जुड़ी जानकारी, बीमा दावों की प्रक्रिया, योजना की निगरानी और रिपोर्ट तैयार करने जैसे काम शामिल हैं. इससे विभागों और बीमा से जुड़े लोगों के लिए जानकारी को संभालना और जरूरी काम पर नजर रखना आसान हो सकता है. सरकार ने इस पोर्टल को पशुधन बीमा कार्यक्रम को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए तैयार किया है.
बीमा क्लेम की प्रक्रिया पर रहेगी नजर
पशु का बीमा होने के बाद अगर किसी वजह से बीमा क्लेम करना पड़ता है तो उसकी प्रक्रिया भी काफी जरूरी होती है. नए पोर्टल में क्लेम से जुड़े काम को डिजिटल तरीके से व्यवस्थित करने की सुविधा होगी. इससे दावे से जुड़ी जानकारी को संभालने और उसकी प्रक्रिया पर नजर रखने में मदद मिलेगी. सरकार का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था से काम में पारदर्शिता और अलग-अलग स्तर पर तालमेल बेहतर करने में मदद मिल सकती है.
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13 भाषाओं में मिलेगी सुविधा
पशुधन बीमा पोर्टल को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए इसे कई भाषाओं में उपलब्ध कराने की बात कही गई है. सरकार के मुताबिक, पोर्टल हिंदी और अंग्रेजी के साथ 11 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगा. यानी कुल 13 भाषाओं में इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा. इससे अलग-अलग राज्यों के पशुपालकों को अपनी समझ की भाषा में बीमा से जुड़ी जानकारी हासिल करने में आसानी हो सकती है.
बीमा के लिए सिर्फ 15% प्रीमियम देना होगा
पशुधन बीमा योजना में लाभार्थी के हिस्से का प्रीमियम घटाकर 15 प्रतिशत किया गया है. यानी पशुपालक को बीमा की कुल रकम का सिर्फ 15% हिस्सा देना होगा बाकी 85 प्रतिशत राशि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर देती हैं. सामान्य राज्यों में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 60:40 है, जबकि हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों में यह 90:10 है. केंद्र शासित प्रदेशों में बाकी प्रीमियम केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता है. यह सुविधा बीमा योजना का नियम है, पोर्टल की अलग छूट नहीं.
ज्यादा पशुओं का कराया जा सकेगा बीमा
पशुधन बीमा योजना में एक परिवार के लिए बीमा की सीमा भी बढ़ाई गई है. सूअर और खरगोश को छोड़कर बाकी पशुओं के लिए सीमा 5 पशु इकाई से बढ़ाकर 10 पशु इकाई की गई है. एक पशु इकाई का मतलब एक बड़ा पशु या 10 छोटे पशु है. यानी एक लाभार्थी 10 बड़े पशुओं या 100 छोटे पशुओं तक का बीमा करा सकता है. सूअर और खरगोश के लिए 5 पशु इकाई की सीमा लागू है.
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