खेती में किसानों का खर्च सिर्फ ट्रैक्टर, हार्वेस्टर या दूसरी कृषि मशीनों तक सीमित नहीं होता. बल्कि सिंचाई, सोलर पंप, पॉलीहाउस, बागवानी और फसल तैयार होने के बाद की सुविधाओं पर भी पैसे खर्च होते हैं. इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें अलग-अलग योजनाओं के जरिए किसानों को वित्तीय सहायता देती हैं.
ऐसे में जानिए सरकार के द्वारा चलाई जानें वाले कुछ ऐसी योजनाओं के बारे में, जो आपको खेती करने के लिए सहायता करती है. जिससे आपकी शुरुआती लागत कम होने में मदद मिलती है.
ड्रिप और स्प्रिंकलर पर मिलती है मदद
पानी की बचत करने वाली ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के लिए सरकार की पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC) योजना महत्वपूर्ण है. यह योजना अब राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY-RAFTAAR) के तहत लागू की जा रही है. इसके तहत छोटे के लिए माइक्रो इरिगेशन सिस्टम की निर्धारित यूनिट लागत पर 55 परसेंट और अन्य किसानों के लिए 45 परसेंट तक वित्तीय सहायता दी जाती है. कुछ राज्य इसके ऊपर अतिरिक्त सहायता भी देते हैं.
सोलर पंप पर सब्सिडी
खेती में डीजल और बिजली की लागत कम करने के लिए प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) के तहत सोलर पंप और मौजूदा कृषि पंपों के सोलराइजेशन को बढ़ावा दिया जाता है. सामान्य राज्यों में पात्र मामलों में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से 30-30 परसेंट की सहायता का प्रावधान है, जबकि कुछ विशेष राज्यों/क्षेत्रों में केंद्रीय सहायता अधिक है.
पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस के लिए सहायता
अगर किसान पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस या शेडनेट के जरिए संरक्षित खेती करना चाहते हैं, तो एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत सहायता मिल सकती है. इस योजना में संरक्षित खेती के साथ-साथ नई बागवानी, नर्सरी और गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री जैसी गतिविधियों में मदद की जाती है.
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गोदाम और कोल्ड स्टोरेज के लिए भी सुविधा
फसल तैयार होने के बाद उसके सुरक्षित भंडारण के लिए कृषि अवसंरचना कोष (AIF) का लाभ लिया जाता है. यह योजना वेयरहाउस, पैक हाउस, कोल्ड चेन, प्राथमिक प्रोसेसिंग और दूसरी पोस्ट-हार्वेस्ट सुविधाओं के लिए वित्तीय सहायता देती है.
बागवानी और नए बगीचे लगाने पर सहायता
फल, सब्जी, फूल और दूसरी बागवानी फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए MIDH के तहत नए बगीचे लगाने, नर्सरी, पौध सामग्री और संरक्षित खेती जैसी गतिविधियों में वित्तीय व तकनीकी सहायता दी जाती है. इससे किसान पारंपरिक फसलों के अलावा उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों पर फोकस कर के अपनी आय बढ़ा सकते हैं.
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