बकरी पालन को आमतौर पर दूध और मांस के कारोबार से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन बकरी से निकलने वाली मेंगनी यानी गोबर भी किसानों के लिए उपयोगी संसाधन है. बकरी की मेंगनी में पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, इसलिए इसका इस्तेमाल खेतों और बागवानी में जैविक खाद के तौर पर किया जाता है. इसे अच्छी तरह इकठ्ठा करके और सुखाकर इसे स्थानीय स्तर पर बेचकर अच्छी आय कमाई जा सकती है.
कितने रुपये किलो बिकती है बकरी की मेंगनी?
बकरी की मेंगनी की कोई एक तय बाजार कीमत नहीं है. इसका भाव स्थान, मात्रा, नमी, साफ-सफाई, पैकिंग और खरीददार के आधार पर बदलता है. ग्रामीण इलाकों में किसान इसे स्थानीय स्तर पर खाद के रूप में बेचते हैं, जबकि पैक की गई जैविक खाद की कीमत काफी अलग होती है. ऑनलाइन बाजार में सूखी बकरी की खाद अक्सर छोटे पैकेटों में बेची जाती है. इसलिए वहां प्रति किलो कीमत थोक में मिलने वाली कच्ची मेंगनी की कीमत से काफी अधिक दिखाई देती है.
बकरी की मेंगनी से क्या बनता है?
इसका सबसे सामान्य इस्तेमाल जैविक खाद बनाने में होता है. बकरी की सूखी मेंगनी को सीधे खेत में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन अच्छी तरह सड़ी या कम्पोस्ट की गई खाद पौधों के लिए अधिक उपयोगी और सुरक्षित होती है. इसमें सूखे पत्ते, फसल अवशेष और अन्य जैविक सामग्री मिलाई जाती है. उचित नमी और हवा के साथ कुछ समय तक सड़ाने के बाद तैयार कम्पोस्ट खेत में इस्तेमाल की जाती है.
यह भी पढ़ें: घर की छत पर उगाई जा सकती है हरी प्याज, बस इन बातों का रखें ध्यान
वर्मी कम्पोस्ट में भी इस्तेमाल
बकरी की मेंगनी का एक और महत्वपूर्ण उपयोग वर्मी कम्पोस्ट बनाने में किया जाता है. इसमें केंचुओं की मदद से जैविक पदार्थों को अधिक उपयोगी खाद में बदला जाता है. हालांकि ताजा मेंगनी को सीधे केंचुओं के बेड में डालना उचित नहीं माना जाता. इसे पहले कुछ समय तक सड़ाकर या प्री-कम्पोस्ट करके इस्तेमाल किया जाता है, ताकि अत्यधिक गर्मी और अमोनिया जैसी समस्या कम हो सके. तैयार वर्मी कम्पोस्ट का इस्तेमाल सब्जियों, फलों, फूलों और सजावटी पौधों की खेती में किया जाता है.
बकरी पालकों के लिए कमाई का जरिया
बकरी पालक अगर मेंगनी को खुले में फेंकने के बजाय अलग से इकट्ठा करें, सुखाएं और व्यवस्थित तरीके से रखें तो इससे अतिरिक्त आय का अवसर बनाया जा सकता है. इसे स्थानीय किसानों, नर्सरियों और जैविक खेती करने वालों को बेचकर मुनाफा कमाया जा सकता है.
यह भी पढ़ें: कितने रुपये से शुरू हो जाती है झींगा की खेती, इन्हें पालने में कितना मुनाफा?
