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क्यों मुश्किल है सी बकथॉर्न की खेती, यह कितने रुपये किलो बिकता है?

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ABP News
September 20, 20263 min read
क्यों मुश्किल है सी बकथॉर्न की खेती, यह कितने रुपये किलो बिकता है?

सी बकथॉर्न (Sea Buckthorn) को लद्दाख की ‘वंडर बेरी’ या ‘लेह बेरी’ भी कहा जाता है. नारंगी-पीले रंग के छोटे फल वाला यह पौधा हिमालय के ठंडे और शुष्क इलाकों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है. भारत में इसका प्रमुख क्षेत्र लद्दाख है, जबकि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी यह पाई जाती है.

हाल ही में लद्दाख में सी बकथॉर्न की कीमत बढ़ाकर 300 रुपए किलोग्राम कर दिया है. वहीं इसके उत्पादों की कीमत 700 से 3,000 रुपये तक प्रति लीटर/किलोग्राम तक हो गई है. ऐसे में जानिए सी बकथॉर्न से जुड़ी कुछ अन्य जानकारी.

सी-बकथॉर्न की खेती क्यों मुश्किल है?

सी-बकथॉर्न देखने में बेहद मजबूत पौधा है और अत्यधिक ठंड, सूखे तथा तेज हवाओं को सहन कर सकता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसकी खेती आसान है. सबसे बड़ी चुनौती इसका जियोग्राफिकल एरिया और जलवायु क्षेत्र है. इसकी खेती मुख्य रूप से ऊंचाई वाले ठंडे रेगिस्तानी इलाकों में होती है, जहां तापमान काफी नीचे चला जाता है और पानी की उपलब्धता सीमित रहती है.

फल तोड़ना है चुनौती

दूसरी बड़ी समस्या फल तोड़ने की है. पौधे की शाखाओं पर कांटे होते हैं और छोटे फल आसानी से तोड़ने पर खराब हो सकते हैं. इसलिए हाथ से फल तोड़ना बेहद मुश्किल होता है. वहीं इसके पौधों को फल देने में लगभग तीन साल लगते हैं और एक पौधे से करीब 4 किलो तक फल मिलता है. ताजे फलों का जल्दी खराब होने का डर होता है. मुश्किल पहाड़ी इलाकों से बाजार तक इन्हें ले जाने के लिए बेहतर ट्रांसपोर्टेशन और कोल्ड-चेन की जरूरत पड़ती है.

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सी-बकथॉर्न कितने रुपये किलो बिकता है?

सितंबर 2026 में लद्दाख प्रशासन ने किसानों से सी-बकथॉर्न की खरीद के लिए न्यूनतम कीमत 300 रुपये प्रति किलो घोषित की है. इससे पहले पिछले वर्ष इसकी खरीद कीमत 150 रुपये प्रति किलो थी. लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लेह में आयोजित पहले दो दिवसीय 'इंटरनेशनल सी-बकथॉर्न कॉन्क्लेव' के उद्घाटन के दौरान इसकी कीमतों को बढ़ाने की घोषणा की. इसका मतलब है कि कच्चे फल का भाव अब मंहगा हो गया है. वहीं जूस, तेल, जैम, कॉस्मेटिक और इससे बनने वाले अन्य उत्पादों की कीमत में भी बढ़ोतरी हो सकती है.

किसानों के लिए क्यों बढ़ रहा है महत्व?

सी-बकथॉर्न केवल फल देने वाला पौधा नहीं है. इसकी जड़ें मिट्टी में नाइट्रोजन जोड़ने में मदद करती हैं और पौधा मिट्टी के कटाव को रोकने तथा ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों के पर्यावरण बचाव में भी उपयोगी माना जाता है. इसके फलों का इस्तेमाल खाद्य पदार्थों, पेय, कॉस्मेटिक और विभिन्न उत्पादों में किया जाता है.

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