धान की रोपाई पूरी होते ही खेतों में हरियाली लौटने लगी है. लेकिन इसी के साथ खाद की मांग भी अचानक आसमान छूने लगी है. देश के कई हिस्सों में रोपाई का काम लगभग 97 फीसदी तक निपट चुका है. फसल को सही समय पर पोषण देने के लिए किसान अब यूरिया और डीएपी की दुकानों के चक्कर काट रहे हैं. मांग बढ़ते ही कई जगहों से खाद की जमाखोरी, मनमाने दाम वसूलने और कालाबाजारी की सुगबुगाहट भी सामने आने लगी है.
इसे देखते हुए बिहार सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है. कृषि विभाग ने साफ कर दिया है कि किसानों की मजबूरी का फायदा उठाने वाले बिचौलियों और मुनाफाखोरों को बिल्कुल नहीं बख्शा जाएगा. किसानों को सही दाम और बिना किसी परेशानी के खाद मिल सके इसके लिए सरकार ने टोल-फ्री हेल्पलाइन और व्हाट्सएप नंबर जारी किया है. जानें किन नंबर्स पर आप कर सकते हैं शिकायत
शिकायत के लिए टोल-फ्री और व्हाट्सएप नंबर जारी
किसानों को अपनी बात सीधे सरकार तक पहुंचाने के लिए कृषि विभाग ने एक मजबूत शिकायत तंत्र तैयार किया है. अगर कोई दुकानदार खाद देने से मना करता है ओवररेटिंग करता है या फिर जानबूझकर कमी पैदा करने की कोशिश करता है. तो किसान तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसके लिए बिहार सरकार ने टोल-फ्री किसान हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1551 चालू किया है. जिस पर फ्री कॉल करके अपनी समस्या बताई जा सकती है.
इसके अलावा सरकार ने व्हाट्सएप नंबर 7766085888 भी जारी किया गया है. किसान दुकान का नाम, लोकेशन और ओवररेटिंग से जुड़ा कोई भी सबूत इस नंबर पर सीधे मैसेज कर सकते हैं. कृषि मंत्री के मुताबिक कंट्रोल रूम में मिलने वाली हर शिकायत पर तुरंत संज्ञान लिया जाएगा. इसके साथ ही किसान अपने इलाके के प्रखंड कृषि पदाधिकारी, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी और जिला कृषि पदाधिकारी से भी सीधे संपर्क कर सकते हैं.
खाद का पूरा स्टॉक मौजूद
बाजार में खाद की मांग बढ़ते ही कुछ असामाजिक तत्व यह अफवाह फैलाने लगे थे कि नई फार्मर आईडी व्यवस्था के तहत किसानों के खाद कोटे में कटौती की जा रही है. बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए पूरी तरह बेबुनियाद और भ्रामक बताया है. सरकार ने साफ किया है कि किसी भी किसान के हिस्से की खाद में एक दाने की भी कटौती नहीं की गई है.
राज्य में यूरिया, डीएपी और दूसरे जरूरी उर्वरकों का सही मात्रा में स्टॉक मौजूद है और रेल रैक के जरिए लगातार नई सप्लाई पहुंच रही है. प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह में आकर जरूरत से ज्यादा खाद खरीदने की होड़ में न पड़ें. पैनिक बाइंग से बाजार में बेवजह की दिक्कत खड़ी हो सकती है. जिसका फायदा मुनाफाखोर दुकानदार उठाते हैं.
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मनमानी वसूली पर ऐसे करें सीधी शिकायत
कालाबाजारी पर लगाम कसने के लिए सरकार ने खुद किसानों को भी सजग और सतर्क रहने को कहा है. कृषि विभाग ने खास अपील की है कि जब भी किसान भाई किसी भी खाद केंद्र या निजी दुकान से खाद खरीदें, तो पीओएस मशीन से निकली आधिकारिक और पक्की रसीद जरूर मांगें. रसीद लेने से न सिर्फ सही वजन और तय सरकारी कीमत की गारंटी मिलती है. बल्कि गड़बड़ी करने वाले दुकानदारों पर कानूनी शिकंजा कसना भी आसान हो जाता है.

अगर कोई खाद विक्रेता तय सरकारी रेट से से एक रुपया भी ज्यादा मांगता है या खाद के साथ जबरन कोई दूसरा गैर-जरूरी उत्पाद आपको बेचने की कोशिश करता है. तो किसान बिना डरे इसकी जानकारी सीधे जिला प्रशासन या राज्य मुख्यालय को दे सकते हैं. इतना ही नहीं शिकायत करने वाले किसान की पहचान ङी गोपनीय रखी जाएगी और दोषी पाए जाने वाले डीलरों का लाइसेंस रद्द करने के साथ-साथ उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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