गुड़हल का पौधा अपने बड़े और खूबसूरत फूलों के लिए जाना जाता है. इसे घर की बालकनी, छत, आंगन या बगीचे में आसानी से लगाया जा सकता है. कई बार गुड़हल का पौधा खूब पत्तियां और नई शाखाएं तो निकालता है, लेकिन उसमें फूल नहीं आते. गुड़हल का पौधा लगाना तो आसान होता है. इसलिए लोग उसे लगाने के बाद उसकी देखभाल पर ध्यान देना बंद कर देते हैं.
ऐसी स्थिति में लोग अक्सर पौधे को ज्यादा खाद या पानी देना शुरू कर देते हैं, जबकि इसकी वजह कुछ और भी हो सकती है. अगर आपके गमले में लगा गुड़हल भी फूल नहीं दे रहा है तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना जरूरी है. जानें गुड़हल के पौधे की सही देखभाल और कुछ जरूरी बातों के बारे में.
पौधे को पर्याप्त धूप दें
गुड़हल में फूल कम आने की एक बड़ी वजह पर्याप्त धूप न मिलना हो सकती है. इस पौधे को अच्छी रोशनी पसंद ह. अगर पौधा ऐसी जगह रखा है जहां दिनभर छाया रहती है, तो उसकी पत्तियां तो बढ़ सकती हैं, लेकिन फूल आने में कमी होने लगती है. गमले को ऐसी जगह रखें जहां पौधे को रोज कई घंटे सीधी धूप मिल सके. हालांकि बहुत तेज गर्मी में पौधे की स्थिति देखकर उसकी देखभाल करें और जरूरत के अनुसार दोपहर की कड़ी धूप से बचाव करें.
जरूरत से ज्यादा पानी न दें
गुड़हल को पानी चाहिए, लेकिन हर दिन जरूरत से ज्यादा पानी देना सही नहीं है. लगातार गीली मिट्टी रहने से जड़ों पर असर पड़ता है और पौधे की बढ़वार प्रभावित होने लगती है. पानी देने से पहले गमले की ऊपरी मिट्टी को उंगली से छूकर देखें. अगर मिट्टी ऊपर से सूखी महसूस हो तो ही पौधे को पानी दें. साथ ही गमले में नीचे पानी निकलने के लिए पर्याप्त छेद जरूर होने चाहिए. जिससे गमले में पानी न भरें.
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समय-समय पर करें छंटाई
गुड़हल के पौधे में पुरानी, कमजोर और सूखी शाखाओं को हटाना जरूरी है. समय-समय पर छंटाई करने से पौधे में नई शाखाओं के विकास होने में मदद मिलती है. नई शाखाओं पर आगे चलकर फूल आने की संभावना रहती है. हालांकि छंटाई बहुत ज्यादा न करें. पौधे की स्थिति और मौसम को ध्यान में रखकर केवल सूखी या कमजोर शाखाओं को हटाना बेहतर रहता है.
मिट्टी की भी जांच करें
गमले में कई साल से एक ही मिट्टी रहने पर उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने लगती है. ऐसे में अगर मिट्टी बहुत ज्यादा सख्त हो गई है या पानी आसानी से नहीं निकल रहा है, तो पौधे की जड़ों को पर्याप्त हवा और पोषक तत्व नहीं मिल पाते. गुड़हल के लिए ऐसी मिट्टी बेहतर रहती है जिसमें पानी की निकासी अच्छी हो और जैविक पदार्थ मौजूद हों. समय-समय पर मिट्टी को हल्का ढीला करें और जरूरत के अनुसार इसमें जैविक सामग्री मिलाएं.
कीटों पर रखें नजर
अगर पौधे की नई पत्तियां सिकुड़ रही हैं, चिपचिपी हो रही हैं या पत्तियों के नीचे छोटे कीड़े दिखाई दे रहे हैं तो यह कीटों का हमला हो सकता है. कीट पौधे का रस चूसकर उसकी बढ़वार और फूल बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर देते हैं. इसलिए सप्ताह में एक-दो बार पत्तियों और नई शाखाओं की जांच करें. समस्या दिखाई देने पर शुरुआती स्तर पर ही उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं.
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