अगर आप खेती में कोई ऐसी फसल लगाने की सोच रहे हैं, जिससे अच्छी आमदनी के साथ सरकारी मदद भी मिल सके, तो आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. केंद्र सरकार केले की खेती को बढ़ावा देने के लिए मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत किसानों को आर्थिक सहायता देती है. यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है. ऐसे में आइए जानते हैं इस योजना से जुड़ी अन्य जानकारी के बारे में.
केले की खेती पर कितनी मिलती है सब्सिडी?
MIDH के तहत केले की खेती के लिए मिलने वाली सहायता खेती के तरीके और इस्तेमाल पर निर्भर करती है. केंद्र सरकार के अनुसार, सामान्य क्षेत्रों में केले के सकर से खेती के लिए लागत 2 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर रखा गया है. इस पर 40 फीसदी तक सहायता मिलती है. यानी निर्धारित लागत के हिसाब से 80 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक सहायता बन सकती है. वहीं ड्रिप सिंचाई के बिना निर्धारित लागत 87 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर है, जिस पर 40 फीसदी सहायता मिलती है.
ड्रिप सिंचाई का भी मिलता है फायदा
MIDH की खास बात यह है कि केले की खेती में ड्रिप सिंचाई को भी एकीकृत पैकेज का हिस्सा बनाया गया है. इसका फायदा यह है कि किसान को केवल पौध लगाने तक ही सहायता सीमित नहीं रहती, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से बाग तैयार करने में भी मदद मिलती है.
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टिश्यू कल्चर केले की खेती पर जोर
केले की खेती में अच्छी गुणवत्ता वाले पौधों का बहुत महत्व होता है. टिश्यू कल्चर पौधों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक केले की खेती में किया जाता है. MIDH के तहत ऐसे पौधों से केले की खेती को भी सहायता के अंदर रखा गया है. सरकार ने हाल के वर्षों में बागवानी क्षेत्र में गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री और माइक्रो-इरिगेशन जैसी सुविधाओं को बढ़ावा दिया है.
किसानों को ऐसे मिलेगा लाभ
MIDH एक केंद्र सरकार की योजना है और इसे राज्यों के माध्यम से लागू किया जाता है. इसलिए किसान को आवेदन और लाभ लेने के लिए अपने राज्य के उद्यान विभाग या संबंधित स्टेट हॉर्टिकल्चर से संपर्क करना होता है. योजना के तहत सहायता राज्य के नियम, लागत, पात्रता और उपलब्ध बजट के अनुसार मिलती है. इस योजना का फायदा सिर्फ खेत में पौधे लगाने तक सीमित नहीं है. MIDH के तहत गुणवत्ता वाले पौधें, नए बागों की स्थापना, माइक्रो इरिगेशन, पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट और मार्केटिंग जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाता है. यानी केले की खेती करने वाले किसानों के लिए MIDH योजना खेती की शुरुआती लागत कम करने और वैज्ञानिक तरीके से बाग तैयार करने में मददगार होती है.
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