आजकल लोग खानपान को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं. बाजार में भी ऐसी सब्जियों की मांग बढ़ रही है, जो स्वादिष्ट होने के साथ खाने और पकाने में आसान हों. इसी बीच परवल की एक खास किस्म काफी डिमांड में है, जिसे सीडलेस यानी बिना बीज वाला परवल कहा जा रहा है. सामान्य परवल में मौजूद सख्त बीज कई बार खाने के दौरान परेशानी पैदा करते हैं, लेकिन इस नई किस्म में बीज बेहद छोटे और मुलायम होते हैं. कुछ फलों में तो बीज बिल्कुल नहीं मिलते. यही वजह है कि लोगों के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है.
इस खास किस्म को बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित किया है. इसे तैयार करने में वैज्ञानिकों को पांच साल से अधिक का समय लगा. फिलहाल बिहार के कई जिलों में किसान इसकी खेती कर रहे हैं. इसकी एक और खासियत यह है कि सामान्य परवल के मुकाबले इसे अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इससे किसानों और कारोबारियों को उपज बेचने के लिए अतिरिक्त समय मिलता है.
किचन गार्डन में ऐसे करें खेती
अगर आप किचन गार्डनिंग करना पसंद करते हैं, तो यह परवल की बेल आपके किचन गार्डन के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है. इसे घर के आंगन, छत या बगीचे में आसानी से लगाया जा सकता है. हालांकि इसकी बेल को फैलने और ऊपर चढ़ने के लिए पर्याप्त जगह और सहारे की जरूरत होती है. सबसे पहले ऐसी जगह का चुनाव करें, जहां पौधे को रोजाना पर्याप्त धूप मिल सके.
सही मिट्टी है जरूरी
परवल की अच्छी बढ़वार के लिए उपजाऊ और पानी की निकासी वाली मिट्टी जरूरी सबसे अच्छी मानी जाती है. इसके लिए बगीचे की मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाएं. अगर आप इसे गमले में लगाना चाहते हैं तो बड़ा और गहरा गमला चुनें, ताकि जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके.
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बीज की जगह बेल की कटिंग से लगाएं पौधा
परवल उगाने के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय या संबंधित कृषि विज्ञान केंद्र से इस किस्म के प्रमाणित पौधों और रोपण सामग्री की जानकारी लें. इससे आपको सही किस्म मिल सकेगी. परवल की खेती में बेल की कटिंग और जड़ से निकले पौधों का इस्तेमाल किया जाता है. घर में इसे लगाने के लिए किसी स्वस्थ परवल की बेल से कटिंग लेना बेहतर होता है. ध्यान रखें कि कटिंग स्वस्थ और रोगमुक्त हो. इसे तैयार मिट्टी में लगाकर हल्की सिंचाई करें.
बेल को सहारा देना है जरूरी
परवल एक बेल वाली सब्जी है. इसलिए पौधा बढ़ने लगे तो उसके लिए लकड़ी, बांस, तार या लोहे की जाली से मचान तैयार करें. बेल को इस सहारे पर चढ़ाएं, ताकि वह जमीन पर फैलने के बजाय ऊपर की ओर बढ़े. इससे पौधे को पर्याप्त हवा और रोशनी मिलेगी. साथ ही फल मिट्टी के सीधे संपर्क में नहीं आएंगे, जिससे उनके खराब होने की संभावना भी कम हो जाएगी.
पानी और खाद का रखें खास ध्यान
परवल के पौधे को नियमित रूप से पानी की जरूरत होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गमले या क्यारी में हमेशा नमी बनी रहे. ज्यादा पानी जमा होने से जड़ें सड़ सकती हैं. ऐसे में गर्मियों में मिट्टी की नमी देखकर सिंचाई करें और बारिश के मौसम में अतिरिक्त पानी बाहर निकलने का इंतजाम रखें. पौधे की अच्छी बढ़वार के लिए समय-समय पर जैविक खाद डालते रहें और सूखी और खराब पत्तियों को हटाते रहें, जिससे पौधे की सेहत बनी रहे. परवल में फूल आने के बाद धीरे-धीरे फल बनने लगते हैं.
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