आज के समय में खेती के सामने मौसम और बढ़ती लागत सबसे बड़े सवाल बन गए हैं. ऐसे में किसान ट्रेडिशनल खेती से हटकर अब कुछ नया तलाश रहे हैं. पॉलीहाउस खेती इसी दिशा में एक बढ़िया ऑप्शन है. जो कम ज़मीन पर भी तगड़ा मुनाफा दे सकता है. सबसे अच्छी बात यह है कि अगर आप बड़े पैमाने पर कमर्शियल खेती करना चाहते हैं. तो सरकार की ओर से इस पर तगड़ी आर्थिक मदद भी मिल जाती है.
नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड और मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर जैसी योजनाओं के तहत किसानों को प्रोजेक्ट कॉस्ट का बड़ा हिस्सा सब्सिडी के तौर पर दिया जाता है. अगर आप सही प्लानिंग के साथ आगे बढ़ें तो इस आधुनिक तकनीक के जरिए लाखों की कमाई की जा सकती है और इसके लिए आपको 1 करोड़ रुपये तक की भारी-भरकम सब्सिडी भी मिल सकती है. बस जरूरत है तो इस पूरी प्रोसेस को अच्छे से समझने जिससे आपको किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
क्या होती है पॉलीहाउस खेती?
पॉलीहाउस एक ऐसा ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक का ढांचा होता है. जिसके अंदर फसलों के लिए एक दम कंट्रोल्ड माहौल तैयार किया जाता है. इसमें बाहर की तेज धूप, आंधी, बारिश और कीट-पतंगों का सीधा असर फसलों पर नहीं पड़ता. किसान इसमें अपनी मर्जी के हिसाब से तापमान और नमी को मैनेज कर सकते हैं. यही वजह है कि इसमें बेमौसम की सब्ज़ियां और अच्छी क्वालिटी के रंग-बिरंगे फूल भी आसानी से उगाए जा सकते हैं.
खुले खेतों के मुकाबले पॉलीहाउस में पौधों का ग्रोथ रेट बहुत तेज होता है और पैदावार भी कई गुना ज्यादा निकलती है. आज के दौर में जब सब्जियों और फूलों की मांग मार्केट में हमेशा बनी रहती है. तो किसान जरबेरा, कार्नेशन, शिमला मिर्च और खीरा जैसी हाई-वैल्यू फसलें उगाकर बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. यह तकनीक सिर्फ खेती का तरीका नहीं बदल रही. बल्कि छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल रही है.

पॉलीहाउस लगाने के लिए कितनी ज़मीन चाहिए?
अगर आप कमर्शियल लेवल पर पॉलीहाउस लगाने की सोच रहे हैं. तो इसके लिए ज़मीन के अपने कुछ तय पैमाने होते हैं. सामान्य मैदानी इलाकों में बड़े स्तर पर पॉलीहाउस खेती के लिए आमतौर पर 2500 वर्ग मीटर से ज्यादा ज़मीन की जरूरत पड़ती है, हालांकि पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए नियम थोड़े अलग हो सकते हैं. ज़मीन तय करने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह आता है कि इसमें कौन-सी फसलें उगाई जाएं. जिससे तगड़ा रिटर्न मिले.
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उगाएं यह फसलें
पॉलीहाउस के अंदर आप जरबेरा, कार्नेशन, गुलाब, लिलियम और ऑर्किड जैसे महंगे फूलों के साथ-साथ रंग-बिरंगी शिमला मिर्च, चेरी टमाटर और बिना बीज वाले खीरे की बंपर पैदावार ले सकते हैं. सरकार की तरफ से मिलने वाली मदद और सब्सिडी इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस तरह की फसल और प्रोजेक्ट डिजाइन को चुनते हैं. इसलिए खेत की मिट्टी, पानी की उपलब्धता और लोकल मार्केट की डिमांड को ध्यान में रखकर ही किसी खास फसल का चुनाव करें जिससे आपकी लागत के पैसे वसूल तो हों साथ ही मुनाफा मिल सके.
कैसे मिलती है 1 करोड़ तक की सब्सिडी?
पॉलीहाउस पर मिलने वाली सब्सिडी को लेकर किसानों के मन में अक्सर कई तरह के सवाल रहते हैं. तो आपको बता दें सरकार सीधे आपके हाथ में 1 करोड़ रुपये नकद नहीं देती. बल्कि यह रकम आपके बैंक लोन के खाते में एडजस्ट होती है. इसके लिए सबसे पहले आपको नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरी जानकारी देखनी होती है और ऑनलाइन आवेदन करना होता है.
आवेदन के दौरान आपके पास ज़मीन के डाॅक्यूमेंट, बैंक लोन के दस्तावेज और पूरा प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर होना जरूरी है. सबसे बड़ी गलती जो कई किसान कर बैठते हैं. वह यह है कि वह बिना सब्सिडी अप्रूव हुए ही खुद ही पॉलीहाउस बनवा लेते हैं.
आपको ऐसा बिल्कुल नहीं करना है. पहले अपनी ज़मीन और प्रोजेक्ट की पात्रता जांचें, बैंक से लोन अप्रूव करवाएं और सरकारी विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद ही काम शुरू करें. काम पूरा होने के बाद जब टीम आकर जांच करती है. तब जाकर यह सब्सिडी सीधे आपके बैंक लोन खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है.

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