भारत में गांजे की खेती को लेकर अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या किसान सरकार से लाइसेंस लेकर इसकी खेती कर सकते हैं. नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 यानी NDPS Act के तहत cannabis plant यानी गांजे की खेती और गांजे के उत्पादन पर कड़े प्रतिबंध हैं. ऐसे में जानिए इसकी खेती करने के लिए लाइसेंस कैसे मिलता है और इसे पाने के लिए कहां आवेदन करना होता है.
गांजे की खेती के लिए लाइसेंस मिलता है
NDPS Act की धारा 8 के तहत गांजे की खेती पर प्रतिबंध है, सिवाय उन परिस्थितियों के जिन्हें कानून के तहत विशेष रूप से अनुमति दी गई हो. इसलिए कोई व्यक्ति केवल खेती करने या गांजा बेचने के उद्देश्य से आम कृषि लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं कर सकता. कानून में राज्य सरकारों को कुछ परिस्थितियों में गांजे की खेती, उत्पादन और कब्जे को नियमों के माध्यम से नियंत्रित करने की शक्ति दी गई है.
आवेदन कहां करना होता है?
गांजे की सामान्य खेती के लिए कोई सामान्य ऑनलाइन किसान-लाइसेंस आवेदन प्रक्रिया नहीं है. NDPS Act की धारा 14 सरकार की गांजे की खेती को केवल इंडस्ट्रीयल उद्देश्यों जैसे फाइबर प्राप्त करने या बागवानी के लिए विशेष शर्तों के साथ अनुमति देने की व्यवस्था करती है. इसका अर्थ यह नहीं है कि गांजे के फूलों की सामान्य खेती या बिक्री की अनुमति मिल जाती है. ऐसे में इच्छुक व्यक्ति को सबसे पहले अपने राज्य के नारकोटिक्स विभाग से यह स्पष्ट करना चाहिए कि फसल और उसका उद्देश्य किस कानूनी श्रेणी में आता है.
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बिना लाइसेंस खेती करने पर पर होती है सजा
बिना अनुमति गांजे की खेती करना कानूनी अपराध होता है. केंद्रीय राजस्व विभाग के अनुसार NDPS Act के तहत बिना लाइसेंस गांजे की खेती पर 10 साल तक के कठोर कारावास और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है. इसके अलावा गांजे की अवैध खेती से प्राप्त उत्पाद को रखना, बेचनाया खरीदना भी अलग-अलग परिस्थितियों में NDPS Act के तहत अपराध होता है.
इंडस्ट्रीयल हेंप क्या होता है?
भारत में इंडस्ट्रीयल हेंप की खेती कुछ राज्यों में राज्य सरकार द्वारा दिए गए लाइसेंस के आधार पर होती है. इंडस्ट्रीयल हेंप गांजे की एक खास प्रकार की किस्म है, जिसमें नशीला पदार्थ टेट्राहाइड्रोकैबिनोल (THC) बहुत कम यानी 0.3% या उससे भी कम होता है. इसके उत्पादन से कपड़े, रस्सी और केनवास बनाए जाते हैं. वहीं यह पेड़ के मुकाबले जल्दी तैयार हो जाता है और इससे बना कागज रिसाइकल भी किया जा सकता है.
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