भारत में अगर खाने में मिर्च कम रह जाए तो स्वाद नहीं आता. इसलिए मिर्च की मार्केट में खूब डिमांड रहती है. अगर सबसे सबसे तीखी मिर्च की बात करें तो यह भी भारत में उगाई जाती है. इसका नाम है भूत जोलोकिया जो नॉर्थ-ईस्ट के जंगलों से निकलकर पूरी दुनिया में अपने खतरनाक तीखेपन की वजह से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी अपना नाम दर्ज करा चुकी है. इसे घोस्ट पेपर के नाम से भी जाना जाता है और इसका नाम सुनते ही अच्छे-अच्छे दिग्गजों के पसीने छूट जाते हैं.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह तीखी मिर्च किसानों के लिए कमाई का एक बहुत बड़ा जरिया भी बन सकती है. आज के समय में इस खास मिर्च की डिमांड देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लगातार बढ़ती जा रही है. जिससे इसकी खेती करने वाले किसान बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. अगर आप भी हटकर कुछ अलग खेती करने का मन बना रहे हैं. तो भूत जोलोकिया की खेती आपके लिए बढ़िया ऑप्शन साबित हो सकती है.
क्या है भूत जोलोकिया मिर्च की खासियत?
भूत जोलोकिया यानी घोस्ट पेपर कोई आम मिर्च नहीं है. बल्कि यह अपने अंदर ऐसा खतरनाक तीखापन समेटे हुए है कि इसका नाम सुनते मुंह जलने लगता है. इसे स्कोविल हीट यूनिट्स के पैमाने पर परखा जाता है. जहां इसका तीखापन दस लाख से भी ज्यादा यूनिट्स को पार कर जाता है. मूल रूप से असम, नागालैंड और मणिपुर जैसे उत्तर-पूर्वी राज्यों की यह देन आज ग्लोबल मार्केट में अपनी एक अलग पहचान बना चुकी है. वैज्ञानिक भाषा में इसे कैप्सिकम चाइनेन्स परिवार का हिस्सा माना जाता है.
जो दिखने में थोड़ी सिकुड़ी हुई और बेहद चमकदार होती है. इसका तीखापन इतना ज्यादा तेज होता है कि इसे काटते और संभालते वक्त हाथों में दस्ताने पहनना बेहद जरूरी हो जाता है. वरना स्किन में भयंकर जलन हो सकती है. दुनिया भर के फूड लवर्स और तीखी चटनी या सॉस बनाने वाली कंपनियां इस मिर्च की तलाश में रहती हैं. क्योंकि इसके जरा से इस्तेमाल से ही खाने का स्वाद और तीखापन उस लेवल पर पहुंच जाता है जो किसी और मिर्च से मुमकिन नहीं है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग हमेशा आसमान पर रहती है.

कैसे की जाती है भूत जोलोकिया की खेती?
किसी भी फसल की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप उसे कैसा माहौल दे रहे हैं. इस मिर्च को उगने के लिए गर्म और उमस भरा यानी ट्रॉपिकल क्लाइमेट जरूरी है. जहां तापमान 24 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच हो. इसके पौधों को जलभराव बिल्कुल पसंद नहीं है. इसलिए आपके खेत की मिट्टी ऐसी होनी चाहिए जो उपजाऊ होने के साथ-साथ एकदम वेल-ड्रेन हो यानी पानी तुरंत निकल जाए.
खेती शुरू करने से पहले खेत की गहरी जुताई करके उसमें पर्याप्त मात्रा में गोबर की सड़ी हुई खाद मिला देना चाहिए. जिससे मिट्टी की सेहत मजबूत हो सके. इसके बीज थोड़े जिद्दी होते हैं और उगने में थोड़ा वक्त लेते हैं, इसलिए ज्यादातर किसान पहले नर्सरी ट्रे में इसके पौधे तैयार करते हैं. जब पौधे चार से छह हफ्ते के हो जाते हैं और मजबूत दिखने लगते हैं, तब उन्हें मुख्य खेत या बड़े गमलों में ट्रांसप्लांट किया जाता है.

यह भी पढ़ें: सेहतमंद सब्जियों के शौकीन हैं तो गमले में उगाएं करेला, जान लें तरीका
इतने दिन बाद तुड़ाई
ट्रांसप्लांट करने के करीब 90 से 120 दिनों के अंदर यह फसल हार्वेस्टिंग के लिए बिल्कुल तैयार हो जाती है. जब मिर्चें पककर अपनी पूरी चमक और रंगत में आ जाती हैं. तुड़ाई करते वक्त पूरी सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि इसके अंदर का कैपेससैल ऑयल बहुत खतरनाक होता है. इसलिए हाथों में ग्लव्स पहनना ना भूलें.
कमर्शियल लेवल पर खेती करने वाले किसान इसे ताजा बेचने के साथ-साथ सुखाकर पाउडर, अचार और महंगे हॉट सॉस बनाने वाली कंपनियों को सप्लाई करते हैं. चूंकि इसकी पैदावार कम जगह में भी शानदार होती है और विदेशी बाजारों में इसके दाम बहुत ऊंचे मिलते हैं. इसलिए यह खेती कम लागत में मालामाल बनने का एक बेहतरीन और रास्ता है.
यह भी पढ़ें: क्या होती है पॉलीहाउस खेती, इसमें कैसे मिलती है 1 करोड़ की सब्सिडी?
