लहसुन भारत में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख मसाला फसलों में से एक है. इसकी मांग घरेलू खपत के साथ-साथ बाजार और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में भी रहती है. अगर आप सही समय पर बुवाई करते हैं और मिट्टी, सिंचाई व खाद का ध्यान रखते हैं, तो आप लहसुन की अच्छी फसल पा सकते हैं.
मिट्टी का चुनाव
लहसुन की खेती के लिए भुरभुरी, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है. खेत में पानी का लंबे समय तक रुकना लहसुन की गांठों को प्रभावित कर सकता है और फंगल रोगों का खतरा बढ़ा सकता है. लहसुन के लिए मिट्टी का pH लगभग 6 से 7.5 के बीच होना अच्छा माना जाता है. खेत तैयार करते समय मिट्टी को अच्छी तरह भुरभुरा करना और खरपतवार हटाना जरूरी है.
ऐसे करें खेत की तैयारी
लहसुन की बुवाई से पहले खेत की अच्छी जोतना चाहिए. मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए आप उसमें गोबर या अन्य जैविक खाद मिला सकते हैं. इससे फसल के विकास में मदद मिलती है. वहीं खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था होना जरुरी है. खेत में पानी भरा होने से फसल प्रभावित हो सकती है.
लहसुन की बुवाई का सही समय
भारत के अधिकांश मैदानी क्षेत्रों में लहसुन की खेती मुख्य रूप से रबी मौसम में की जाती है. बुवाई का सही समय क्षेत्र और स्थानीय मौसम पर निर्भर करता है. आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर के दौरान इसकी बुवाई की जाती है. बुवाई के लिए स्वस्थ, रोगमुक्त और अच्छी गुणवत्ता वाली गांठों से बड़ी कलियां चुननी चाहिए. कलियों को अलग करने के बाद उन्हें बहुत गहराई में लगाने की बजाय उन्हें मिट्टी में इस तरह लगाया जाता है कि उनका नुकीला हिस्सा ऊपर की ओर रहे.
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सिंचाई सही समय पर करें
लहसुन की फसल को नियमित नमी की आवश्यकता होती है, लेकिन खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए. बुवाई के बाद जरूरत के अनुसार पहली सिंचाई की जाती है और इसके बाद मिट्टी व मौसम की स्थिति देखकर सिंचाई करना बेहतर होता है.
खरपतवार और रोगों से बचाव
लहसुन की शुरुआती दिनों में खरपतवार फसल के साथ पोषक तत्व, पानी और जगह ले लेती हैं. इसलिए समय-समय पर इन्हें साफ करना बेहतर होता है. अत्यधिक नमी और खराब जल निकासी से फफूंद जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में खेत में उचित दूरी और जल निकासी बनाए रखना महत्वपूर्ण है.
लहसुन की खुदाई कब करें?
जब लहसुन के पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगें और ऊपर से सूखने लगें, तब फसल के तैयार होने का संकेत मिल जाता है. सही समय पर खुदाई करने के बाद गांठों को मिट्टी से निकालकर कुछ समय तक अच्छी तरह सुखाया जाता है. लहसुन को सूखी, हवादार और नमी से सुरक्षित जगह पर रखने से उनकी स्थिती अच्छी रहती है.
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