Government Schemes: खेती से होने वाली कमाई पर मौसम का असर पड़ता है. कभी बारिश कम हो जाती है, तो कभी फसल का सही भाव नहीं मिलता. ऐसे में कई किसान चाहते हैं कि उनके पास कमाई का एक और जरिया हो. अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं, तो डेयरी का बिजनेस आपके लिए मुनाफे का सौदा हो सकता है. मध्य प्रदेश सरकार की आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना इसी दिशा में मदद करती है. इसके तहत पात्र किसान गाय या भैंस की डेयरी यूनिट लगाने के लिए बैंक से 10 लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध कराया जाता है.
मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, योजना में डेयरी यूनिट की अधिकतम लागत 10 लाख रुपये तक रखी गई है. परियोजना लागत का 75 फीसदी हिस्सा बैंक लौन से जुटाने का प्रावधान है. बाकी रकम में सरकारी सहायता और किसान का अपना योगदान शामिल होता है.
कितनी मिलेगी सब्सिडी
सामान्य वर्ग के पात्र लोगों को परियोजना की कुल लागत का 25 फीसदी, यानी अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की मदद मिल सकती है. वहीं, एससी-एसटी वर्ग के पात्र लोगों को लागत का 33 फीसदी, यानी अधिकतम 2 लाख रुपये तक मिल सकते हैं. इसके अलावा, अगर लाभार्थी समय पर कर्ज चुकाता है, तो उसे 7 साल तक हर साल 5 फीसदी ब्याज की भरपाई भी मिल सकती है. हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं और साल में अधिकतम 25,000 रुपये तक की मदद मिलेगी.
कितनी गाय या भैंस से शुरू कर सकते हैं डेयरी?
इस योजना में कम से कम 5 या उससे अधिक दुधारू पशुओं की यूनिट के लिए आवेदन कर सकते हैं. पशुपालक गाय या भैंस में से अपनी जरूरत के हिसाब से चुनाव कर सकते हैं. लेकिन पशु खरीदने से पहले उनके दूध देने की क्षमता, चारे का खर्च और स्थानीय बाजार में दूध के भाव का हिसाब लगाना जरूरी है.
अगर दस भैंसों से रोजाना 2,500 से 3,000 रुपये के दूध की बिक्री होती है, तो महीने का कुल कारोबार करीब 75,000 से 90,000 रुपये बन सकता है. हालांकि, यह सिर्फ एक उदाहरण है, कमाई का पक्की गणित नहीं. इसमें से चारा, दाना, मजदूरी, इलाज, बीमा और दूसरे खर्च घटाने होंगे. दूध का उत्पादन कम होने या भाव गिरने पर आमदनी भी घट सकती है.

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कैसे करें आवेदन?
- नजदीकी पशु चिकित्सालय जाएं: वहां पशु चिकित्सा अधिकारी से योजना का आवेदन फॉर्म और मौजूदा नियमों की जानकारी लें.
- जरूरी दस्तावेज जमा करें: आवेदन फॉर्म, जमीन के कागज और पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार रखें. अनुसूचित जाति या जनजाति के आवेदकों को जाति प्रमाणपत्र भी देना पड़ सकता है.
- ग्राम सभा से मंजूरी लें: आवेदक के नाम पर ग्राम सभा में विचार किया जाता है. इसके बाद प्रस्ताव जनपद पंचायत और संबंधित जिला स्तर पर भेजा जाता है.
- बैंक से लोन की मंजूरी: पशुपालन विभाग मंजूर प्रस्ताव बैंक को भेजता है. बैंक की मंजूरी के बाद लोन और अनुदान की प्रक्रिया आगे बढ़ती है.
एक एकड़ जमीन और जरूरी कागज
योजना की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पांच पशुओं के लिए कम से कम एक एकड़ कृषि भूमि जरूरी है. पशुओं की संख्या बढ़ने पर जमीन की जरूरत भी बढ़ सकती है. आवेदन के लिए अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशुपालन विभाग के कार्यालय से संपर्क करें. वहां से मौजूदा पात्रता, जरूरी दस्तावेज और आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी लें.
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