Sugarcane Farming: गन्ने की ऐसी किस्म कौन नहीं उगाना चाहेगा, जो जल्दी तैयार हो, पौधों में ज्यादा कल्ले निकले और पैदावार भी बंपर मिले. उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच गन्ने की नई किस्म CoS.23232 को लेकर कुछ ऐसा ही उत्साह देखने को मिला है. इस किस्म के बीज की ऑनलाइन बुकिंग शुरू हुई, तो किसानों ने महज 5 मिनट में पूरा स्टॉक बुक कर लिया. हालत यह रही कि बड़ी संख्या में किसान बीज खरीदने से चूक गए.
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद ने 9 अक्टूबर को इस किस्म के बीज की ऑनलाइन बुकिंग शुरू की थी. इस बार बिक्री के लिए सिर्फ 2 लाख सिंगल बड उपलब्ध कराई गई थीं. मांग इतनी ज्यादा रही कि बुकिंग शुरू होने के कुछ ही मिनटों में पूरा कोटा खत्म हो गया. अब जिन किसानों को बीज नहीं मिल पाया है, उनकी नजर अक्टूबर में होने वाले मिठास मेले पर है.
CoS.23232 गन्ने की किस्म में क्या है खास?
CoS.23232 को सितंबर में खेती के लिए जारी किया गया है. इसे अगेती किस्म बताया गया है, यानी यह दूसरी कई किस्मों के मुकाबले जल्दी पककर तैयार हो सकती है. इससे किसानों को फसल की कटाई और आगे की खेती की योजना बनाने में मदद मिल सकती है. इस किस्म की एक खास बात इसका अच्छा जमाव और पौधों में ज्यादा कल्ले निकलना है. आसान भाषा में समझें, तो बीज लगाने के बाद पौधों का अच्छी तरह उगना और एक पौधे से ज्यादा कल्ले निकलना खेत में गन्ने की संख्या बढ़ाने में मदद कर सकता है. हालांकि, असल नतीजा खेत की मिट्टी, मौसम, सिंचाई और देखभाल पर भी निर्भर करेगा.
एक एकड़ में 400 से 500 क्विंटल तक उपज का दावा
CoS.23232 की औसत उपज करीब 95.56 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है. एक हेक्टेयर में लगभग 2.47 एकड़ जमीन होती है. इस हिसाब से प्रति एकड़ उपज करीब 387 क्विंटल बैठती है. अलग-अलग खेतों में पैदावार अलग हो सकती है, इसलिए 400 से 500 क्विंटल प्रति एकड़ को हर किसान के लिए तय उपज नहीं मानना चाहिए.
चीनी की रिकवरी के मामले में भी इस किस्म को Co 0238 से बेहतर बताया जा रहा है. चीनी की रिकवरी का मतलब है कि गन्ने से चीनी कितनी मात्रा में निकलती है. रिकवरी अच्छी होने से चीनी मिलों के लिए गन्ने की उपयोगिता बढ़ सकती है. हालांकि, किसानों को अपने इलाके के हिसाब से किस्म की आधिकारिक सिफारिश और प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी जरूर देखनी चाहिए.
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अब किसानों को कब मिलेगा बीज?
ऑनलाइन बुकिंग का कोटा पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद अक्टूबर में होने वाले मिठास मेले में भी CoS.23232 के बीज उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है. इसके अलावा, इस किस्म की बढ़ती मांग को देखते हुए सिंगल बड और टिशू कल्चर तकनीक से बीज उत्पादन बढ़ाने की योजना है. जिन किसानों को ऑनलाइन बुकिंग में बीज नहीं मिल पाया, वे परिषद की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें. बीज खरीदते समय उसकी असली पहचान, उपलब्धता और अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्तता की पुष्टि जरूर करें.
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