खेती में कीटों का हमला किसानों के लिए बड़ी परेशानी है. इससे पैदावार भी घटती है और फसल की क्वालिटी भी खराब होती है. ऐसे में ट्रैप क्रॉप तकनीक किसान भाइयों के काम आती है. इसमें मुख्य फसल के पास ऐसे पौधे लगाए जाते हैं, जो कीटों को अपनी ओर खींच लेते हैं. इससे मुख्य फसल पर कीटों का दबाव कम होता है और कीटनाशक भी कम इस्तेमाल होते हैं
क्या है ट्रैप क्रॉप और कैसे करती है काम ?
ट्रैप क्रॉप एक सहायक फसल है, जिसे मुख्य फसल को नुकसान पहुंचाने वाले खास कीटों को अपनी ओर खींचने के लिए उगाया जाता है. इन पौधों को खेत की मेड़ों पर और मुख्य फसल की कतारों के बीच लगाया जाता है. कीट जब इन पौधों की तरफ जाते हैं, तो मुख्य फसल पर उनका हमला कम हो जाता है. पौधों का चुनाव कीट और मुख्य फसल को देखकर किया जाता है. बुवाई का समय और पौधों की संख्या भी मायने रखती है. कई बार ट्रैप क्रॉप को मुख्य फसल से पहले बोया जाता है, ताकि कीटों को खींचने वाले पौधे समय पर तैयार हो जाएं.
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किस फसल के साथ कौन सा पौधा लगाएं ?
अलग-अलग फसलों के लिए अलग ट्रैप क्रॉप काम आती हैं. जैसे पत्तागोभी और फूलगोभी में डायमंडबैक मॉथ जैसे कीटों से बचाव के लिए सरसों लगाई जाती है. कपास में कुछ हालात में भिंडी को सहायक फसल की तरह लगाया जाता है. टमाटर में गेंदा कुछ खास कीटों और मिट्टी में रहने वाले नेमाटोड को संभालने में मदद करता है, पर इसे हर कीट के लिए असरदार ट्रैप क्रॉप मानना सही नहीं
इसलिए पहले अपने खेत के कीट की पहचान करें, फिर उसी हिसाब से पौधे चुनें. सिर्फ खेत के किनारे कोई भी पौधा लगा देने से हर कीट से बचाव नहीं होता. सही जोड़ी चुनने के लिए कृषि विशेषज्ञ या अपने इलाके के कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें .
ट्रैप क्रॉप के फायदे
सही तरीके से इस्तेमाल करने पर इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि मुख्य फसल पर कीटों का दबाव घटता है. इससे जरूरत के हिसाब से ही कीटनाशक छिड़कना काफी होता है. नतीजा यह कि खेती की लागत घट जाती है और रासायनिक दवाओं का पर्यावरण पर असर भी कम होता है. पर ट्रैप क्रॉप पर जमा हुए कीटों पर नजर रखना भी जरूरी है. अगर इन पौधों पर कीटों को काबू नहीं किया गया, तो वे दोबारा मुख्य फसल में फैलते हैं. इसलिए जरूरत पड़ने पर प्रभावित पौधों को हटा दें या कृषि विशेषज्ञ की सलाह से कीट नियंत्रण करें.
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