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लहसुन के कंद छोटे क्यों रह जाते हैं, कौन सी गलती करते हैं किसान?

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ABP News
October 11, 2026•3 min read
लहसुन के कंद छोटे क्यों रह जाते हैं, कौन सी गलती करते हैं किसान?

लहसुन की खेती किसानों के लिए अच्छी आमदनी का जरिया होती है, लेकिन कई बार खेत में फसल अच्छी दिखाई देने के बावजूद लहसुन के कंद छोटे रह जाते हैं. इस वजह से उत्पादन घटता है और बाजार में उपज की गुणवत्ता के अनुसार कम कीमत मिलती है. अक्सर किसान बीज का चयन, बुवाई का समय, खाद की मात्रा और सिंचाई जैसी छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देते. यह वजह होती है कि लहसुन के कंद छोटे रह जाते हैं.

लहसुन के कंदों का आकार मुख्य रूप से उनकी किस्म, मिट्टी और मौसम पर निर्भर करता है. ऐसे में यदि किसान इन्हें नजरअंदाज करता है, तो लहसुन की फसल प्रभावित हो सकती है. जानें कुछ सामान्य गलतियों के बारे में जिनसे लहसुन के कंद छोटे रह जाते हैं.

छोटी और कमजोर कलियों का चयन

लहसुन की अच्छी फसल के लिए स्वस्थ और रोगमुक्त आकार की कलियों का चुनाव जरूरी है. बहुत छोटी, सूखी और खराब कलियों से उगने वाले पौधे कमजोर हो सकते हैं. ऐसे पौधों में कंदों का विकास भी प्रभावित होता है. अच्छे और बड़े कंद के लिए बुवाई के समय स्वस्थ कलियों को चुनाव करें. ध्यान रहे कि कलियों का आकार और गुणवत्ता दोनों ही अच्छी हो.

बुवाई में देरी करना

लहसुन की बुवाई का समय क्षेत्र और किस्म के अनुसार तय होता है. आमतौर पर भारत में लहसुन की बुवाई का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से नवंबर के बीच माना जाता है. देर से बुवाई करने पर पौधों को पर्याप्त अनुकूल मौसम नहीं मिल पाता. इससे पत्तियों का विकास और कंद बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. ऐसे में अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुसार समय पर बुवाई करने से आपको स्वस्थ कंद मिल सकते हैं.

पौधों के बीच कम दूरी रखना

कई किसान अधिक पौधे लगाने के लिए कलियों के बीच दूरी कम रखते हैं. इससे पौधों के बीच पानी, पोषक तत्वों, प्रकाश और जगह की कमी हो जाती है. इसी वजह से कंदों को पर्याप्त जगह नहीं मिलती और उनका आकार छोटा रह जाता है. ऐसे में पौधों को नियमित दूरी पर लगाना बेहतर होता है.

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खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल

लहसुन को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की जरूरत होती है. पोषक तत्वों की कमी से पौधों का विकास रुक सकता है. वहीं कुछ किसान अच्छी फसल के लिए जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि इस वजह से पत्तियों की बढ़वार तो बढ़ सकती है लेकिन कंदों के विकास में परेशानी होती है.

सिंचाई में लापरवाही

पानी की कमी से पौधों के विकास में परेशानी होती है. वहीं इसका मतलब यह नहीं कि खेत में लगातार नमी या जलभराव रखना होता है. खेत में अधिक पानी होने से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और फंगल इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है. मिट्टी की नमी और मौसम के अनुसार सिंचाई करना सबसे बेहतर होता है. वहीं खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होने से भी मदद मिलती है.

खरपतवार की अनदेखी

खरपतवार लहसुन के पौधों के पोषक तत्व और पानी ले लेते हैं, जिसका उनका विकास प्रभावित होता है. वहीं थ्रिप्स जैसे कीट और पत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले रोग पौधों की विकास में परेशानी पैदा करते हैं. इससे कंदों को बढ़ने में मुश्किल होती है. ऐसे में खेत की नियमित रुप से जांच करें और खरपतवार को समय-समय पर हटाएं.

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