Mustard Farming: सरसों की खेती करने वाले किसान चाहते हैं कि फसल की पैदावार भी अच्छी हो और उपज बेचने पर सही दाम भी मिले. लेकिन सरसों की पहचान सिर्फ उसके दानों से नहीं होती, बल्कि उससे निकलने वाले तेल और तेल निकालने के बाद बचने वाली खली की क्वालिटी भी मायने रखती है. इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा ने सरसों की 'पूसा डबल जीरो मस्टर्ड-36' किस्म तैयार की है.
इस किस्म की खासियत समझने के लिए आपको सबसे पहले 'डबल जीरो' का मतलब जानना होगा. सरसों के तेल में इरूसिक एसिड और खली में ग्लूकोसिनोलेट्स पाए जाते हैं. इनकी ज्यादा मात्रा तेल की क्वालिटी और खली के पशु आहार के रूप में इस्तेमाल पर असर डाल सकती है. IARI के मुताबिक, पूसा डबल जीरो मस्टर्ड-36 के तेल में इरूसिक एसिड सिर्फ 0.45 फीसदी है, जबकि इसकी खली में ग्लूकोसिनोलेट्स 19.50 पीपीएम हैं. इसी वजह से इसे डबल जीरो किस्म कहा जाता है.
एक हेक्टेयर में करीब 20 क्विंटल उपज
इस किस्म की औसत पैदावार 2,019 किलो प्रति हेक्टेयर यानी करीब 20.2 क्विंटल बताई गई है. इसके बीजों में तेल की मात्रा 41.82 फीसदी है. फसल को पकने में लगभग 129 से 133 दिन लगते हैं. हालांकि, किसान यह ध्यान रखें कि औसत पैदावार हर खेत में एक जैसी नहीं मिलती. जमीन, मौसम, सिंचाई, खाद और फसल की देखभाल के हिसाब से उत्पादन कम या ज्यादा हो सकता है.
किसानों को तेल और खली, दोनों में फायदा
सरसों की इस किस्म का फायदा सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है. तेल निकालने के बाद बचने वाली खली का इस्तेमाल पशुओं के आहार में भी किया जाता है. इसमें ग्लूकोसिनोलेट्स की मात्रा कम होने से इसकी क्वालिटी के लिहाज से फायदा हो सकता है. इससे उन किसानों को भी लाभ मिल सकता है, जो खेती के साथ पशुपालन करते हैं. बेहतर क्वालिटी के तेल और खली के कारण बाजार में इस किस्म की मांग बढ़ने की संभावना हो सकती है. हालांकि, किसानों को इसका ज्यादा भाव मिलेगा या नहीं, यह स्थानीय मंडी, तेल मिल और खरीदारों पर निर्भर करेगा.
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किन इलाकों के किसान कर सकते हैं खेती?
IARI के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर के मैदानी इलाकों में और हिमाचल प्रदेश में इस किस्म की खेती की जा सकती है. इसकी बुवाई सिंचित खेतों में समय पर करने की सलाह दी गई है.
बीज खरीदने से पहले रखें ध्यान
किसान पूसा डबल जीरो-36 का बीज भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र या लाइसेंस प्राप्त विक्रेता से ही लें. बीज खरीदने से पहले उपलब्धता और अपने इलाके के लिए इसकी सिफारिश की जांच कर लें. बुवाई का समय, बीज की मात्रा और खाद के इस्तेमाल की सही जानकारी नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से लेना बेहतर रहेगा.
साथ ही, किसान अपने इलाके की मंडी या तेल मिल से यह भी पता कर लें कि इस किस्म की सरसों के लिए अलग भाव मिलता है या नहीं. इससे खेती शुरू करने से पहले लागत और कमाई का सही अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी.
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