Crop Irrigation Tips: खेती में अच्छी पैदावार के लिए जितना जरूरी खाद और बीज है, उतना ही जरूरी सही समय पर खेत में पानी देना भी है. कई बार किसान फसल को हरा-भरा देखकर बार-बार सिंचाई कर देते हैं, तो कुछ किसान खेत में पानी देने में देरी कर देते हैं. दोनों ही स्थितियों में फसल को नुकसान हो सकता है.
ज्यादा पानी देने से जड़ों को हवा नहीं मिल पाती और पौधों की बढ़त रुक सकती है. वहीं, जरूरत के समय पानी न मिलने पर पौधे मुरझाने लगते हैं और पैदावार पर असर पड़ता है. ऐसे में किसान कुछ आसान संकेतों से पहचान सकते हैं कि अब खेत में पानी देने का समय हो गया है.
मिट्टी देखकर समझें पानी की जरूरत
खेत में पानी देने का समय जानने का सबसे आसान तरीका मिट्टी की नमी देखना है. इसके लिए खेत की ऊपरी सतह को देखकर ही फैसला न करें. हाथ से थोड़ी मिट्टी हटाकर अंदर की नमी जांचें. अगर मिट्टी सूखी और भुरभुरी है और हाथ में दबाने पर उसका ढेला नहीं बन रहा, तो फसल को पानी की जरूरत हो सकती है. वहीं, अगर मिट्टी में अभी नमी है और वह हाथ में दबाने पर हल्का ढेला बना रही है, तो सिंचाई कुछ समय के लिए टाली जा सकती है.
पौधों के पत्ते भी देते हैं संकेत
फसल के पत्ते देखकर भी पानी की कमी का अंदाजा लगाया जा सकता है. अगर पौधों के पत्ते सामान्य से ज्यादा झुकने लगे हैं, मुरझाए दिख रहे हैं या उनका रंग फीका पड़ रहा है, तो यह पानी की कमी का संकेत हो सकता है. हालांकि, पत्तों का मुरझाना बीमारी या ज्यादा गर्मी की वजह से भी हो सकता है. इसलिए सिर्फ पत्ते देखकर तुरंत पानी न दें, पहले मिट्टी की नमी भी जांच लें.
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मौसम के हिसाब से करें सिंचाई
गर्मी के दिनों में खेत की मिट्टी जल्दी सूखती है, इसलिए फसल को पानी की जरूरत जल्दी पड़ सकती है. वहीं, ठंड और कुहासे के मौसम में मिट्टी में नमी ज्यादा समय तक बनी रहती है. बारिश होने के बाद भी तुरंत सिंचाई करने की जरूरत नहीं होती. ऐसे में किसान मौसम और खेत की हालत देखकर ही पानी दें. ध्यान रखें कि तेज धूप और गर्म हवा के समय सिंचाई करने से पानी जल्दी सूख सकता है. सुबह या शाम का समय सिंचाई के लिए बेहतर रहता है.
हर फसल को एक जैसा पानी नहीं चाहिए
गेहूं, सरसों, आलू और सब्जियों जैसी फसलों की पानी की जरूरत अलग-अलग होती है. फसल किस अवस्था में है, मिट्टी कैसी है और मौसम कैसा चल रहा है, इन बातों से भी सिंचाई का समय बदलता है. खासकर फूल आने और दाना बनने के समय कई फसलों में पानी की कमी से पैदावार घट सकती है. इसलिए किसान अपनी फसल के हिसाब से सिंचाई का समय तय करें.
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