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Wheat Sowing: गेहूं की बंपर पैदावार के लिए 15 नवंबर तक करें बुवाई, कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

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ABP News
November 2, 2026•3 min read
Wheat Sowing: गेहूं की बंपर पैदावार के लिए 15 नवंबर तक करें बुवाई, कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

Gehun Ki Buwai: अगर आप भी रबी सीजन में गेहूं और जौ की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए जरूरी खबर है. अगर आप चाहते हैं कि, फसल अच्छी तरह बढ़े औप पैदावार भी बंपर हो तो बुवाई का सही समय जानना सबसे जरूरी है. भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान ने किसानों को 1 से 15 नवंबर के बीच गेहूं और जौ की बुवाई पूरी करने की सलाह दी है.

संस्थान के मुताबिक, समय पर बुवाई करने से बीजों का अंकुरण अच्छा होता है. इसके साथ ही फसल को बढ़ने के लिए पूरा समय भी मिलता है. लेकिन बुवाई में देरी करने पर फसल पकते समय तापमान बढ़ सकता है, जिससे दाने छोटे रह जाते हैं और पैदावार घट सकती है.

1 से 15 नवंबर तक पूरी कर लें बुवाई

संस्थान के अनुसार, गेहूं और जौ की अगेती बुवाई के लिए नवंबर का पहला पखवाड़ा यानी 1 से 15 नवंबर का समय अहम है. किसानों को कोशिश करनी चाहिए कि, इस दौरान बुवाई पूरी कर लें. अगर बुवाई में ज्यादा देरी होती है, तो फसल को दाना भरने के समय बढ़ते तापमान का सामना करना पड़ सकता है. इससे दानों का आकार और वजन प्रभावित हो सकता है. इसलिए खेत तैयार रखने और समय पर बीज की व्यवस्था करने में देरी न करें.

उत्तर-पश्चिमी राज्यों के किसान चुनें ये 9 किस्में

संस्थान ने अलग-अलग क्षेत्रों के मौसम और खेती की स्थिति के हिसाब से गेहूं की किस्में सुझाई हैं. उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के सिंचित खेतों के लिए 9 किस्मों की सिफारिश की गई है. इनमें DBW 187, DBW 303, WPC 1270, DBW 327, DBW 332, PWD 872, DBW 370, DBW 371 और DBW 372 शामिल हैं.

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मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के लिए ये किस्में

मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के उदयपुर व कोटा क्षेत्र के सिंचित खेतों के लिए संस्थान ने 8 किस्में सुझाई हैं. इनमें DBW 187, DBW 303, DBW 327, DBW 445, JW 1399 (MP 1399), PWD 906, HD 3463 और JW 543 शामिल हैं.

किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने इलाके के लिए बताई गई किस्मों का ही चुनाव करें. साथ ही, बीज हमेशा भरोसेमंद और प्रमाणित विक्रेता से खरीदें. बिना जानकारी के किसी दूसरे क्षेत्र की किस्म लगाने से फसल में रोग और दूसरी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है.

पराली जलाने के बजाय मशीन से करें बुवाई

संस्थान ने किसानों को धान की पराली जलाने के बजाय हैप्पी सीडर या स्मार्ट सीडर जैसी मशीनों से गेहूं की सीधी बुवाई करने की सलाह दी है. इससे खेत में बची पराली मिट्टी में मिलकर धीरे-धीरे खाद का काम करती है और मिट्टी की सेहत बेहतर बनाने में मदद मिलती है. इसके अलावा, किसान जरूरत से ज्यादा खाद और पानी डालने से बचें. फसल की जरूरत और खेत की नमी देखकर ही सिंचाई करें. सही समय पर बुवाई, इलाके के हिसाब से बीज का चुनाव और संतुलित देखभाल से अच्छी पैदावार लेने में मदद मिल सकती है.

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