अगर आपके घर की छत खाली पड़ी है और आप वहां किचन गार्डनिंग करना चाहते हैं, तो सेम की खेती आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है. सेम एक ऐसी सब्जी है, जिसकी बेल तेजी से बढ़ती है और सही देखभाल मिलने पर अच्छी फलियां देती है. इसे उगाने के लिए बड़े खेत की जरूरत नहीं होती. आप गमले, बाल्टी या ग्रो बैग में भी सेम आसानी से उगा सकते हैं.
सेम की सब्जी पोषक तत्वों से भरपूर एक सेहतमंद हरी सब्जी होती है. सेम की फली में अधिक मात्रा में फाइबर पाया जाता है. वहीं इसमें आयरन, प्रोटीन, कॉपर, जिंक और मैग्नीशियम जैसे तत्व होते हैं, जो शरीर की की इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और खून की कमी को दूर करने में मदद करते हैं. ऐसे में जानिए सेम को उगाने के लिए सही मिट्टी, मौसम, सिंचाई और इससे जुड़ी पूरी जानकारी.
सबसे पहले सही जगह चुनें
सेम की खेती के लिए छत पर ऐसी जगह चुनें, जहां रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे धूप आती हो. पौधे की अच्छी बढ़त और फलियां बनने के लिए धूप जरूरी है. सेम की बेल को अच्छी तरह बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह चाहिए. इसके लिए आप कम से कम 12 से 15 इंच गहरा और चौड़ा गमला या ग्रो बैग चुन सकते हैं. ध्यान रखें कि गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर होने चाहिए. इससे अतिरिक्त पानी बाहर निकलने में मदद मिलती है और जड़ों के सड़ने का खतरा कम होता है.
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ऐसे करें मिट्टी तैयार
सेम के पौधे के लिए ऐसी मिट्टी चुनें, जिसमें पानी आसानी से निकल सके और पौधे को जरूरी पोषण भी मिले. इसके लिए सामान्य बगीचे की मिट्टी में पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद या तैयार कंपोस्ट और थोड़ी रेत मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे मिट्टी हल्की रहेगी और जड़ों को बढ़ने में मदद मिलेगी.
बीज लगाने का सही तरीका
फली उगाने के लिए अच्छे और स्वस्थ सेम के बीज का चुनाव करें. बीज लगाने से पहले मिट्टी में हल्का पानी डाल दें. इसके बाद गमले में करीब 2 से 3 सेंटीमीटर गहराई पर 2 से 3 बीज लगाएं और बीजों के ऊपर मिट्टी की हल्की परत डाल दें. सेम की बेल ऊपर की ओर चढ़ती है, इसलिए पौधा बढ़ने लगे तो उसे सहारे की जरूरत होती है. इसके लिए आप बांस की लकड़ी, रस्सी, जाली या मजबूत तार का इस्तेमाल कर सकते हैं. जब बेल बढ़ने लगे तब उसे धीरे-धीरे सहारे पर चढ़ाएं, ताकि उसकी शाखाएं सही दिशा में बढ़ सकें.
पानी और खाद का रखें ध्यान
सेम के पौधे को नियमित पानी देना जरूरी है. हालांकि पानी देने से पहले मिट्टी की ऊपरी परत जांच लें क्योंकि अधिक पानी से पौधा सड़ सकता है. सेम की फलियां आमतौर पर बीज बोने के करीब 60 से 90 दिन बाद मिलनी शुरू हो जाती हैं. ऐसे में फलियों को तब तोड़ें, जब वे कोमल हों और खाने के लायक आकार में आ जाएं. वहीं नियमित रूप से फलियां तोड़ने से पौधे पर नई फलियां आने में मदद मिलती है.
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