Termite Control In Crops: खेती में दीमक लगना किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है. यह कीट जमीन के अंदर रहकर पौधों की जड़ों और तनों को नुकसान पहुंचाता है. खासकर गेहूं, गन्ना, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी फसलों में इसका असर देखा जाता है. शुरुआत में दीमक का पता नहीं चलता, लेकिन जब पौधे पीले पड़ने और सूखने लगते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है. ऐसे में किसान कुछ आसान उपाय अपनाकर फसल को दीमक से बचा सकते हैं.
दीमक आमतौर पर जमीन के अंदर रहकर पौधों की जड़ों और तने के निचले हिस्से को खाती है. इसके हमले से पौधे कमजोर होने लगते हैं और उनकी बढ़वार रुक जाती है. खेत में कुछ पौधे अचानक पीले पड़कर सूखने लगें या आसानी से उखड़ जाएं तो यह दीमक के हमले का संकेत हो सकता है. गन्ने में दीमक लगने पर बीज के टुकड़े अंदर से खोखले हो सकते हैं और उनमें मिट्टी भर जाती है. खेत में मिट्टी की छोटी-छोटी सुरंगें या दीमक की बांबी दिखना भी इसके होने का संकेत है.
खेत की गहरी जुताई करें
दीमक से बचाव के लिए गर्मी के मौसम में खेत की गहरी जुताई करना फायदेमंद रहता है. इससे जमीन के अंदर मौजूद दीमक और उनके अड्डे बाहर आ जाते हैं. तेज धूप और पक्षियों के खाने से इनकी संख्या कम हो सकती है. फसल कटने के बाद खेत में सूखे डंठल, जड़ें और दूसरे अवशेष नहीं छोड़ने चाहिए, क्योंकि ये दीमक को पनपने का मौका देते हैं. खेत की मेड़ों और आसपास की सफाई रखना भी जरूरी है.
नीम की खली और सड़ी खाद का करें इस्तेमाल
- किसान दीमक का असर कम करने के लिए खेत में नीम की खली का इस्तेमाल कर सकते हैं.
- गेहूं में दीमक के प्रबंधन को लेकर किए गए एक रिसर्च में नीम की खली और बीज उपचार को उपयोगी पाया गया है.
- इसके अलावा खेत में हमेशा अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद ही डालें.
- अधपकी खाद या खेत में पड़े सूखे पौधों के अवशेष दीमक की समस्या बढ़ा सकते हैं.

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बुवाई से पहले बीज का उपचार करें
दीमक से बचाव का एक अच्छा तरीका बीज उपचार भी है. यानी बुवाई से पहले बीज को सही दवा से उपचारित करना. इससे शुरुआती दिनों में पौधों को दीमक से बचाने में मदद मिलती है. हालांकि, बीज उपचार की दवा और उसकी मात्रा फसल के हिसाब से अलग होती है. इसलिए कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह से ही दवा चुनें.
ज्यादा हमला होने पर क्या करें?
अगर खड़ी फसल में दीमक का हमला दिखाई दे तो केवल पानी देने से समस्या खत्म नहीं होती. कुछ समय के लिए नमी बढ़ने से दीमक की गतिविधि कम हो सकती है, लेकिन बाद में हमला फिर बढ़ सकता है. जरूरत पड़ने पर फसल के हिसाब से कृषि विभाग की सलाह से कीटनाशक का इस्तेमाल करें. दवा की मात्रा, इस्तेमाल का तरीका और सावधानियां उसके लेबल के अनुसार ही रखें. बिना सलाह के अलग-अलग दवाओं को मिलाकर इस्तेमाल न करें.
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