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Winter Farming Tips: बदलते मौसम में पाला खराब कर सकता है ये फसलें, जानें क्या करें किसान?

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ABP News
November 7, 2026•4 min read
Winter Farming Tips: बदलते मौसम में पाला खराब कर सकता है ये फसलें, जानें क्या करें किसान?

मौसम में बदलाव का सीधा असर खेती और फसल पर पड़ता है. कभी बेमौसम बारिश तो कभी तेज गर्मी किसानों की मेहनत पर पानी फेर देती है. वहीं सर्दियों में तापमान में अचानक गिरावट आने पर पाला पड़ने का खतरा बढ़ जाता है. खासकर दिसंबर से फरवरी के बीच कई इलाकों में रात का तापमान काफी नीचे चला जाता है. ऐसी स्थिति में खेतों में खड़ी फसलों की पत्तियों और कोमल हिस्सों पर बर्फ जैसी पतली परत जम जाती है.

पाला पड़ने से पौधों की कोशिकाओं में मौजूद पानी जमने लगता है, जिससे उनकी आंतरिक संरचना को नुकसान पहुंचता है. इसका असर पौधों की बढ़वार, फूल आने और फल बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है. कई बार फसल की पत्तियां झुलस जाती हैं और पौधे सूखने लगते हैं. अगर समय रहते बचाव के उपाय नहीं किए जाएं तो यह फसल को नुकसान भी पहुंचा सकती है.

इन फसलों पर सबसे ज्यादा पड़ता है असर

पाले का खतरा खासतौर पर सब्जियों और बागवानी फसलों में अधिक रहता है. टमाटर, आलू, बैंगन, मिर्च, फूलगोभी, मटर, पालक और धनिया जैसी फसलें कम तापमान के प्रति संवेदनशील होती हैं. इसके अलावा मसूर, चना और सरसों जैसी रबी की फसलों को भी पाले से नुकसान पहुंचता है. फलदार पौधों में केला, पपीता और छोटे या नए लगाए गए पौधे ठंड से जल्दी प्रभावित होते हैं. वहीं नर्सरी में तैयार हो रहे छोटे पौधों को पाले से सबसे ज्यादा खतरा रहता है. इनकी पत्तियां और तने काफी कोमल होते हैं, इसलिए तापमान में थोड़ी सी गिरावट भी नुकसान पहुंचा सकती है.

पाला पड़ने से पहले खेत में करें हल्की सिंचाई

किसानों के लिए पाले से बचाव का एक आसान तरीका हल्की सिंचाई करना है. जब मौसम विभाग की ओर से पाला पड़ने की संभावना जताई जाए तो शाम के समय खेत में हल्की सिंचाई करें. मिट्टी में नमी रहने से उसका तापमान बहुत तेजी से नहीं गिरता और फसल को ठंड से कुछ हद तक सुरक्षा मिलती है. हालांकि इस बात का ध्यान रखें कि खेत में जरूरत से ज्यादा पानी जमा न हो. जलभराव होने से जड़ों को नुकसान पहुंचता है. इसलिए मिट्टी और फसल की जरूरत के अनुसार ही सिंचाई करें.

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खेत में धुआं करने से मिल सकती है राहत

पाले की संभावना होने पर किसान खेत की मेड़ों पर सुरक्षित तरीके से धुआं करने का उपाय भी अपना सकते हैं. इसके लिए खेत के अलग-अलग हिस्सों में धुआं पैदा करने की व्यवस्था की जाती है, ताकि जमीन से निकलने वाली गर्मी तेजी से बाहर न जाए. इससे फसल के आसपास के वातावरण का तापमान बनाए रखने में मदद मिलती है. हालांकि इस तरीके में आग लगने का खतरा रहता है. इसलिए इसे पूरी सावधानी के साथ ही करना बेहतर होता है.

नर्सरी और छोटे पौधों को ऐसे बचाएं

सब्जियों की नर्सरी और छोटे पौधों को पाले से बचाने के लिए पुआल, सूखी घास या कृषि उपयोग वाली प्लास्टिक शीट का इस्तेमाल करा बेहतर होता है. रात के समय पौधों को ढक दें और दिन में धूप आने पर कवर हटा दें, ताकि पौधों को पर्याप्त रोशनी और हवा मिल सके. इसी तरह नए लगाए गए फलदार पौधों के तनों को बोरी या पुआल से ढककर ठंडी हवाओं से बचाएं.

मल्चिंग और मेड़ों पर पेड़ लगाने से होगा फायदा

पाले से बचाव के लिए मल्चिंग भी उपयोगी तकनीक है. इसमें पौधों के आसपास मिट्टी को सूखी घास, पुआल या अन्य जैविक सामग्री से ढक दिया जाता है. इससे मिट्टी की नमी और तापमान बनाए रखने में मदद मिलती है. इसके अलावा खेत की उत्तर-पश्चिम दिशा में वायुरोधक पेड़ लगाने से ठंडी हवाओं का सीधा असर कम किया जा सकता है. यह एक ऐसा उपाय है, जिसका फायदा किसानों को कई मौसमों तक मिलता है.

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